महाराष्ट्र की राजनीति में लगातार उठापटक जारी है। शिवसेना के नेता और राज्य मंत्री संजय शिरसाट ने दावा किया है कि उद्धव की शिवसेना को छोड़कर नेता शिंदे की शिवसेना में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सांगली सीट से शिवसेना (यूबीटी) उम्मीदवार के रूप लोकसभा चुनाव लड़ने वाले नेता चंद्रहार पाटिल नौ जून को सत्तारूढ़ शिवसेना में शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि सोमवार को और इस महीने के अंत तक कई लोग हमारी पार्टी में शामिल होंगे। चंद्रहार पाटिल भी शामिल होने वाले हैं। रोक सको तो रोक लो। उद्धव ठाकरे की पार्टी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी उनके साथ रहने को तैयार नहीं है और उन्हें अपनी पार्टी के मामलों को देखना चाहिए।
ये भी पढ़ें: राहुल गांधी के 'जी हुजूर' पर भाजपा का पलटवार, कहा- बेहद घटिया बयान, उनमें परिपक्वता का अभाव
स्थानीय भाजपा नेताओं के नगर निगम चुनावों को लेकर किए जा रहे दावों पर शिरसाट ने कहा कि ये नेता उत्साही हैं और पार्टी के लिए कुछ भी करने के मूड में हैं। हमारी शुभकामनाएं उनके साथ हैं। लेकिन पार्टी को एक कार्यशाला आयोजित करनी चाहिए जिसमें पार्टी नेताओं को सिखाया जाए कि क्या बोलना है।
लोकसभा चुनाव में सांगली सीट पर काफी कड़ा मुकाबला हुआ था। इसमें कांग्रेस नेता विशाल पाटिल ने शिवसेना (यूबीटी) उम्मीदवार चंद्रहर पाटिल के खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। विशाल पाटिल ने भाजपा के वर्तमान सांसद संजय काका पाटिल को हराकर जीत हासिल की, जबकि चंद्रहार पाटिल अपनी जमानत जब्त होने के कारण तीसरे स्थान पर रहे।
महाराष्ट्र में चल रही निकाय चुनाव की तैयारी
महाराष्ट्र में निकाय चुनाव की तैयारी चल रही है। छह मई को सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र चुनाव आयोग को निर्देश दिए थे कि वह चार सप्ताह के भीतर राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों की अधिसूचना जारी करे। पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि राज्य चुनाव आयोग चार महीने में चुनाव संपन्न कराए। पीठ ने राज्य चुनाव आयोग को उचित मामलों में अधिक समय मांगने की स्वतंत्रता प्रदान की।
ये भी पढ़ें: संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से 12 अगस्त तक, केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने दी जानकारी
वार्ड गठन की प्रक्रिया शुरू
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्थानीय निकाय चुनावों के संबंध में वार्ड गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। एक शीर्ष अधिकारी ने सोमवार को बताया कि औपचारिकताएं पूरी होने के बाद साल के अंत तक स्थानीय निकाय चुनाव हो सकते हैं। ओबीसी आरक्षण, वार्ड गठन, स्थानीय निकायों में सदस्यों की संख्या, सरकार की ओर से वार्ड गठन की शक्ति के बारे में याचिकाओं सहित कई कारणों से चुनाव में देरी हुई।