महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष ने राज्य में मध्यावधि चुनाव की भविष्यवाणी की है। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस ने शिवसेना को हिंदुत्व से दूर कर दिया है। ऐसी ही स्थिति रही तो दिसंबर तक राज्य में मध्यावधि चुनाव हो सकते हैं।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि कांग्रेस ने बड़ी प्लानिंग के तहत शिवसेना को हिंदुत्व से दूर किया है। अब शिवसेना के हिंदुत्व की जगह महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को फलने फूलने का मौका दिया जा रहा है।
पाटिल ने चुनौती दी कि अगर शिवसेना ने हिंदुत्व को नहीं छोड़ा है तो वह एनआरसी का समर्थन करे और वीर सावरकर को भारतरत्न देने की मांग करे। उन्होंने कहा कि यदि दिसंबर में विधानसभा मध्यावधि चुनाव हुए तो जनता इसका जवाब देगी।
इससे पहले भीमा कोरेगांव एलगार परिषद हिंसा से संबंधित जांच की जिम्मेदारी एनआईए को सौंपे जाने के बाद शिवसेना ने भाजपा पर निशाना साधा। शिवसेना ने केंद्र सरकार पर गैर भाजपा शासित राज्यों में हस्तक्षेप का आरोप लगाया। शिवसेना ने कहा था कि भूखे भेड़िए की तरह एनआईए को महाराष्ट्र में भेजा, यह ठीक नहीं है। इस संबंध में राज्य के मुख्यमंत्री व गृहमंत्री से चर्चा कर रास्ता निकाला जा सकता था।
शिवसेना ने अपने मुखपत्र में ‘केंद्र का हस्तक्षेप ये उचित नहीं’ शीर्षक के तहत संपादकीय लिखा है कि भारत राज्यों का एक संघ है। इसलिए हर राज्यों के अपने अधिकार और स्वाभिमान हैं। केंद्र की ओर से जबरन उठाए गए इस कदम से अस्थिरता आ रही है। आरोप लगाया है कि एलगार परिषद मामले की जांच एनआईए को सौंप कर केंद्र प्रतिशोध की राजनीति कर रही है।
जबकि पुणे पुलिस इस मामले में संदिग्ध माओवादी संबंधों की जांच कर रही थी। शिवसेना ने सवाल किया कि इस तरह की बहुत सी घटनाएं भाजपा शासित राज्यों में हो रही हैं लेकिन वहां केंद्र क्यों दखल नहीं देता। जिस प्रकार से केंद्र ने भीमा कोरेगांव हिंसा मामले की जांच की जिम्मेदारी एनआईए को सौंपी है क्या वह नहीं चाहती कि सच सामने आए।