आरोप ये भी है कि रंजीतसिंह मोहिते पाटिल ने अपने सहयोगियों और परिवार के सदस्यों को भाजपा उम्मीदवारों के खिलाफ काम करने का निर्देश दिया था और पार्टी कार्यकर्ताओं को धमकाया था, साथ ही पुलिस एजेंटों का इस्तेमाल करके पार्टी कार्यकर्ताओं पर दबाव डाला गया था।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने एक एमएलसी को चुनाव के दौरान कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। भाजपा ने एमएलसी रंजीतसिंह मोहिते पाटिल को कारण बताओ नोटिस जारी सात दिनों के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है। महाराष्ट्र भाजपा ने सोमवार को जारी कारण बताओ नोटिस में कहा कि, 'आप भारतीय जनता पार्टी के प्रतिनिधि के रूप में पार्टी को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों में लिप्त पाए गए हैं। आपके खिलाफ अनुशासनहीनता के कई मामले दर्ज किए गए हैं।'
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चुनाव के दौरान पार्टी के लिए प्रचार न करने का आरोप
महाराष्ट्र भाजपा सचिव मुकुंद कुलकर्णी द्वारा भेजे गए नोटिस में पार्टी ने एमएलसी पर चुनाव के दौरान प्रचार में शामिल न होने का आरोप लगाया है। आरोप ये भी है कि रंजीतसिंह मोहिते पाटिल ने अपने सहयोगियों और परिवार के सदस्यों को भाजपा उम्मीदवारों के खिलाफ काम करने का निर्देश दिया था और पार्टी कार्यकर्ताओं को धमकाया था, साथ ही पुलिस एजेंटों का इस्तेमाल करके पार्टी कार्यकर्ताओं पर दबाव डाला गया था। पार्टी ने उन पर लोकसभा चुनाव के दौरान एनसीपी (एसपी) के उम्मीदवारों का समर्थन करने और भाजपा उम्मीदवारों के खिलाफ प्रचार करने का आरोप लगाया है।
एनसीपी (एसपी) उम्मीदवार का किया समर्थन
गौरतलब है कि रणजीतसिंह मोहिते पाटिल के चचेरे भाई धैर्यशील मोहिते पाटिल ने एनसीपी (एसपी) उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा, जिन्होंने भाजपा के उम्मीदवार के खिलाफ जीत हासिल की। इसके अलावा, भाजपा ने दावा किया कि पार्टी नेता ने विधानसभा चुनावों में भी पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार करने के लिए प्रोत्साहित किया था। एमएलसी ने मालशिरस निर्वाचन क्षेत्र से राकांपा (शरदचंद्र पवार) के उम्मीदवार उत्तमराव जानकर के लिए प्रचार किया, जिन्होंने भाजपा उम्मीदवार राम सतपुते को हराया था।
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जवाब न देने पर होगी कार्रवाई
भाजपा एमएलसी पर एनसीपी (एसपी) से जुड़ी सहकारी संस्थाओं को वित्तीय सहायता देने और अधिकारियों को भी इन संस्थाओं के पक्ष में प्रभावित करने का आरोप है। भाजपा ने रणजीतसिंह मोहिते पाटिल से सात दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने को कहा है पूछा है कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए। पार्टी ने कहा है कि जवाब ने देने पर एमएलसी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।