महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में जयकवाड़ी बांध टूटने के कारण भीव धनोरा गांव के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बांध टूटने के कारण गोदावरी नदी की धारा भीम धनोरा गांव की तरफ बहने लगी, जिससे गांववालों को आवाजाही में मुसीबत बन गई। रोजाना 200-300 लोग नदी को पार कर अपने काम पर जाते हैं।
स्थानीय लोगों से बातचीत करने पर एक ने बताया कि जयकवाड़ी बांध के टूटने के बाद से इस मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, 'हमने सरकार से इसके बारे में बहुत बार कहा, लेकिन उनके तरफ से कोई जवाब नहीं आया। बांध टूटने के कारण अब गांव दो भागों में बंट चुकी है, जिसका एक हिस्सा मुश्किलों का सामना कर रहा है।'
उन्होंने आगे कहा, 'मैं सरकार से फिर से अपील करता हूं कि वह हमें कुछ सुविधाएं उपलब्ध कराएं। यहां करीब 50 से 60 बस्ती है जिसमें से रोजाना 200-300 लोग नदी पार कर यातायात करते हैं। प्रशासन इस मामले में कोई मदद नहीं कर रहा है।'
गांव के जिला परिषद प्राथमिक शाला के हेडमास्टर ने मीडिया को बताया, 'किसान परिवार के छह बच्चे बस्ती से यहं पढ़ने आते हैं। स्कूल आने के लिए उन्हें रोज गोदावरी की धारा पार करना पड़ता है। बच्चे थर्माकॉल की कश्ती बनाकर रोजाना नदीं पर कर स्कूल जा रहे हैं।'
बच्चों के नदी पार कर स्कूल तक पहुंचने पर तहसीलदार सतीश सोनी ने कहा, 'जब गोदावरी नदीं जयकवाड़ी बांध का निर्माण हुआ था, तो बैकवाटर भिव धनोरा गांव में बहता था, इसलिए पूरे गांव को एक नए स्थान पर स्थानांतरित किया गया था। नए गांव में लोगों को नए घर भी दिए गए थे।'
उन्होंने बताया कि गांव वालों में सात-आठ परिवार ऐसे भी हैं जो गांव में न रहकर खेतों में रहते हैं क्योंकि खेती ही उनकी आजीविका का एकमात्र स्त्रोत है। इन्हीं के बच्चे स्कूल जाने के लिए रोजाना थर्माकॉल की कश्ती के जरिए नदी को पार करते हैं।