विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) ने महाराष्ट्र के बारामती में जनवरी में हुए विमान हादसे पर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की है। इसमें उसने सिफारिश की कि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) अनकंट्रोल्ड एयरफील्ड्स पर विजुअल फ्लाइट रूल्स (वीएफआर) उड़ाने वाले सभी ऑपरेटरों को तय मानक संचालन प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करने के लिए जरूरी दिशानिर्देश जारी करे।
बारामती में वीएसआर वेंचर के लियरजेट विमान हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार और चार अन्य लोगों की मौत हो गई थी। अपनी 22 पेज की शुरुआती रिपोर्ट में एएआईबी ने यह भी कहा कि विमान हादसे के सभी पहलुओं की जांच की जाएगी ताकि तथ्य, दुर्घटना की वास्तविक वजह और कारण सामने आ सकें। अब तक सामने आए अंतरिम नतीजों को देखते हुए, यह जरूरी समझा गया है कि ये अंतरिम सुरक्षा सुझाव जारी किए जाएं ताकि विमानन सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए तुरंत आवश्यक बचाव के कदम उठाए जा सकें। एएआईबी ने कहा कि यह सिफारिश की जाती है कि डीजीसीए अनकंट्रोल्ड एयरफील्ड्स के लिए वीएफआर विमान ऑपरेट करने वाले सभी ऑपरेटरों को तय मानक संचालन प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करने के लिए जरूरी निर्देश जारी करे।
इसके अलावा, अनकंट्रोल्ड एयरफील्ड पर एयरोड्रोम सर्विस संभालने के लिए जिम्मेदार सभी एयरोड्रोम ऑपरेटर/ऑर्गनाइजेशन को जरूरी निर्देश भी दिए जा सकते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि एयरफील्ड में फ्लाइंग ऑपरेशन (नॉन-शेड्यूल्ड/प्राइवेट/चार्टर ऑपरेशन सहित) की इजाजत तभी दी जाए जब मौसम की मौजूदा हालत डीजीसीए के संबंधित नियमों में बताए गए मानदंडों के अंदर हों। लियरजेट विमान ने 28 जनवरी की सुबह पहली बार लैंडिंग की कोशिश की लेकिन बाद में गो अराउंड किया गया। दूसरी बार रनवे 11 पर उतरते समय विमान रनवे के बाईं ओर पेड़ों से टकराया और नीचे जमीन पर गिर गया। टक्कर के बाद विमान में आग लग गई और कॉकपिट व केबिन पूरी तरह जल गए।विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से पहले पायलटों को ओह शिट... ओह शिट... कहते हुए सुना गया।
दृश्यता तीन किमी थी जबकि पांच किमी दृश्यता आवश्यक है
रिपोर्ट में कहा गया कि विमान के पायलटों ने बारामती के पास पहुंचने पर दृश्यता के बारे में जानकारी मांगी जिस पर टावर ने 3000 मीटर (तीन किलोमीटर) बताया, जो आवश्यक दृश्यता पांच किलोमीटर से काफी कम है। साथ ही बारामती एयरफील्ड में कोई मौसम संबंधी सुविधा उपलब्ध नहीं है। रनवे 29 की तरफ दो विंड सॉक्स मौजूद हैं, जबकि रनवे 11 की तरफ कोई विंड सॉक्स मौजूद नहीं था। रनवे 11 की ओर ही दुर्घटनाग्रस्त विमान को लैंड कराने की कोशिश हुई थी।
रनवे के सभी निशान मिट चुके
रिपोर्ट में कहा गया है कि सिर्फ विजुअल फ्लाइट रूल्स (वीएफआर) ऑपरेशन ही किए जा सकते हैं लेकिन एयरपोर्ट पर नियमित फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑपरेशन और नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेशन किए जाते हैं। आखिरी रनवे री-कारपेटिंग मार्च 2016 में की गई थी और रनवे री-कारपेटिंग न होने की वजह से रनवे के सभी निशान मिट चुके हैं और रनवे की सतह पर ढीली बजरी दिख रही है। रिपोर्ट में कहा गया कि सॉलिड-स्टेट फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर (एसएसएफडीआर) और सॉलिड-स्टेट कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (एसएससीवीआर) समेत दोनों फ्लाइट रिकॉर्डर विमान के मलबे के पिछले हिस्से में अपनी वास्तविक जगह पर पाए गए। रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों रिकॉर्डर को मलबे से निकाल लिया गया है और डाटा रिकवरी और आगे के एनालिसिस के लिए उन्हें क्वारंटाइन कर दिया गया है।
पायलट पहले भी बारामती के लिए उड़ान भर चुके थे
एएआईबी ने रिपोर्ट में कहा कि विमान वीटी-एसएसके ने 26 जनवरी को मुंबई-सूरत-मुंबई सेक्टर के लिए आखिरी उड़ान भरी थी और उस उड़ान के ऑपरेटिंग क्रू ने कहा कि उन्हें पूरी उड़ान के दौरान विमान में कोई असामान्यता नहीं मिली और यहां तक टेक्नीशियन ने भी कहा कि उड़ान के बाद के जांच के दौरान विमान में कोई असामान्यता नहीं देखी गई थी। एएआईबी ने कहा कि दोनों पायलट पहले बारामती के लिए उड़ान भर चुके थे और उन्हें एयरफील्ड की टोपोग्राफी के बारे में पता था। क्रू को बारामती सहित कई वीआईपी उड़ानों और अनियंत्रित एयरफील्ड में दूसरी उड़ानों को ऑपरेट करने का पहले का अनुभव भी था। पायलटों ने ब्रेथ एनालाइजर (बीए) टेस्ट भी पास कर लिया था।