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प्रकाश अंबेडकर ने किया महाराष्ट्र बंद वापस लेने का ऐलान, CM बोले- हिंसा की हो रही जांच

Wed, 03 Jan 2018 06:29 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भीमराव अंबेडकर के पोते और समाजसेवी प्रकाश अंबेडकर ने 200 साल पुराने भीम कोरेगांव युद्ध के जश्न मनाने को लेकर हुए महाराष्ट्र में बंद के ऐलान को बुधवार को वापस ले लिया। जिसके बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणनवीस ने हिंसा पर जांच के आदेश दिए हैं। सीएम ने कहा 'उन सभी जगहों की जांच के आदेश दिए गए हैं जहां-जहां हिंसा फैली। इसके साथ ही सीसीटीवी फुटेज भी खंगाली जा रही है।'

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बता दें कि इस बंद के दौरान जगह-जगह हिंसक प्रदर्शन हुए। पुणे से शुरू हुई हिंसा की आग अब महाराष्ट्र के 18 जिलों तक फैली जिसका असर आम जन-जीवन पर पड़ रहा है। बंद को सफल बनाने के लिए जहां प्रदर्शनकारी ट्रेन के ट्रैक पर बैठ गए हैं वहीं मेट्रो सेवाभी प्रभावित हुई है। प्रदर्शनकारियों ने असलफा और घाटकोपर मुंबई मेट्रो स्टेशनों को भी बंद करवा दिया है। जबकि एनएम जोशी मार्ग स्थित दुकानों को जबरदस्ती बंद करवाया जा रहा है। 

कोरेगांव हिंसक प्रदर्शन को देखते हुए एसी लोकल ट्रेन को पूरे दिन के लिए सस्पेंड कर दिया गया है। लंबी दूरी की ट्रेनों को रद्द नहीं किया गया है। मुंबई पश्चिमी रेलवे ने कहा कि गोरेगांव में रेल कार्य शुरु हो गया है। वहीं केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि जिग्नेश मेवाणी का इस मामले में कोई लेना-देना नहीं है। अगर मेवाणी का भाषण भड़काऊ होता तो पुलिस जरूर कार्रवाई करती। 
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बंद के कारण आज मुंबई की लोकल ट्रेन से लेकर स्कूल और हाइवे तक को बंद है। महाराष्ट्र बंद का ऐलान करने वालों में बहुजन महासंघ, महाराष्ट्र डेमोक्रेटिक फ्रंट, महाराष्ट्र लेफ्ट फ्रंट समेत 250 से ज्यादा दलित संगठन शामिल हैं। प्रशासन ने ठाणे में 4 जनवरी तक धारा 144 लगा रखी है। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी रेलवे ट्रेक पर बैठकर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रशासन और सुरक्षा कर्मी हालात को सामान्य लाने की कोशिश में जुटे हैं।


ये भी पढ़ें:  जानिए क्या है वो विवाद जिसमें जल रहा महाराष्ट्र, क्यों मनाया जाता है अंग्रेजों की जीत का जश्न?

बता दें कि पुणे जिले में सोमवार को भीमा-कोरेगांव में लड़ाई की 200वीं सालगिरह को शौर्य दिवस के रूप में मनाया गया जिसमें बड़ी तादाद में दलित इकट्ठा हुए थे। इस दौरान कुछ लोगों ने भीमा-कोरेगांव विजय स्तंभ की तरफ जाने वाले लोगों की गाड़ियों पर हमला बोल दिया। इसके बाद हिंसा भड़क गई जिसमें साणसवाड़ी के राहुल पटांगले की मौत हो गई।

हिंसा के विरोध में मंगलवार को मुंबई, नासिक, पुणे, ठाणे, अहमदनगर, औरंगाबाद और सोलापुर सहित राज्य के एक दर्जन से अधिक शहरों में दलित संगठनों ने जमकर तोड़फोड़ और आगजनी की गई। हिंसा में 40 से अधिक गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं जबकि पुणे-अहमदाबाद हाईवे पर 10 वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। स्थिति बिगड़ती देख हिंसाग्रस्त इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात कर दी गई।  
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इसलिए मना रहे थे शौर्य दिवस

Bhima Koregaon Violence
दो सौ साल पहले 01 जनवरी 1818 को अंग्रेजों और ब्राह्मण शासक पेशवा बाजीराव द्वितीय के बीच पुणे-अहमदनगर के बीच भीमा-कोरेगांव में युद्ध हुआ था। इस लड़ाई में अंग्रेजों ने दलितों के साथ मिलकर पेशवाओं को हरा दिया था।

ईस्ट इंडिया की फौज में बड़ी संख्या में दलित थे जिसे महार रेजिमेंट कहा जाता था। अंग्रेजों ने यहां विजय स्तंभ बनाया था। दलित हर साल एक जनवरी को भीमा कोरेगांव में अपनी जीत को शौर्य दिवस के तौर पर मनाते हैं। 

सरकार को बदनाम करने की साजिश, न्यायिक जांच होगी : फडणवीस
हिंसा के मद्देनजर लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फडणवीस ने मंगलवार को कहा कि यह सरकार को बदनाम करने की साजिश है। हमने इस मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं।

हाईकोर्ट के मौजूदा जज इस मामले की जांच करेंगे। हिंसा में मारे गए युवक के परिजनों को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। युवक की हत्या की जांच सीआईडी करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र एक प्रगतिशील राज्य है जो जातीय हिंसा में यकीन नहीं रखता है।
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