एनआईए ने इस मामले में मुंबई पुलिस के बर्खास्त अधिकारी सचिन वाजे और अन्य को गिरफ्तार किया था। वहीं, मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त परमबीर सिंह ने देशमुख पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। इन गंभीप आरोपों की जांच के लिए महाराष्ट्र सरकार की ओर से एक सदस्यीय न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) केयू चांदीवाल आयोग का गठन किया गया है।
चांदीवाल आयोग के सामने बयान देने के दौरान देशमुख ने अनुरोध किया था कि एटीएस को एंटीलिया मामले से जुड़े जांच के दस्तावेज, एक नोट और अन्य दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया जाए। देशमुख ने कहा था कि इससे मामले का असली सच सामने आ जाएगा। आयोग के निर्देश के अनुसार एटीएस ने जांच के दस्तावेज जमा कर दिए थे।
देशमुख के वकील प्रशांत पवार ने कहा कि एटीएस ने जो जांच के कागजात तैयार किए हैं उनके अवाला समन वाली सामग्री और अन्य नोट जमा करने का भी अनुरोध किया गया था। इस पर आयोग के सामने पेश हुए एटीएस के एक अधिकारी ने आयोग को बताया कि एटीएस ने न कोई अलग रिपोर्ट बनाई थी और न ही ऐसे कोई नोट तैयार किए थे।
इस पर आयोग ने अधिकारी को यह बात लिखित में देने को कही जिसका अधिकारी ने अनुपालन किया। इस मामले में अनिल देशमुख को पिछले साल दो नवंबर को गिरफ्तार किया गया था। इस समय वह न्यायिक हिरासत में हैं। अनिल देशमुख पर अब सेवा से निलंबित किए जा चुके परमबीर सिंह ने भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लगाए थे।