महाराष्ट्र में विधानसभा सीटों की गिनती के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भाजपा-नेतृत्व वाली महायुति ने 288 में से 230 से अधिक सीटें जीत लीं, जबकि विपक्षी कांग्रेस-शिवसेना (यूबीटी)-एनसीपी (एसपी) गठबंधन सिर्फ 50 सीटों पर सिमट गया।
आरएसएस ने महायुति के लिए तैयार किया जनमत
चुनावों से पहले आरएसएस ने भाजपा-नेतृत्व वाले गठबंधन के पक्ष में जनमत तैयार करने के लिए व्यापक प्रचार अभियान शुरू किया था। संघ ने अपने सभी संगठनों के साथ मिलकर इस योजना पर काम किया। सूत्रों के अनुसार, 'स्वयंसेवकों' की छोटी-छोटी टोलियां बनाई गईं, जिन्होंने राज्य के हर कोने में जाकर लोगों से संपर्क किया। इन टोलियों ने 5 से 10 लोगों के छोटे समूहों में बैठकें कीं और मोहल्लों में परिवारों से मिलकर अपने संदेश पहुंचाए। एक सूत्र ने बताया, 'उन्होंने अपना काम किया।' इन टोलियों ने राष्ट्रीय हित, हिंदुत्व, सुशासन, विकास, लोक कल्याण और स्थानीय मुद्दों पर चर्चा की, लेकिन भाजपा का सीधा प्रचार नहीं किया।
मतदान के बाद मोहन भागवत से मिले फडणवीस
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हाल ही में कहा कि लोकसभा चुनावों में झटका लगने के बाद विधानसभा चुनावों में 'अराजकतावादियों और वोट जिहादियों' से मुकाबला करने के लिए उन्होंने संघ से मदद मांगी थी। वहीं बुधवार को मतदान समाप्त होने के बाद, देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की।
नतीजों के बाद नितिन गडकरी ने जताया आभार
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पर भाजपा-नेतृत्व वाली महायुति की 'ऐतिहासिक जीत' पर महाराष्ट्र की जनता को बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार राज्य की प्रगति और लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने चुनावों के दौरान जागरूकता बढ़ाने वाले स्वयंसेवी संगठनों का भी आभार व्यक्त किया।
हरियाणा चुनाव में आरएसएस की अहम भूमिका
यह माना जा रहा है कि आरएसएस की तरफ से हरियाणा में आयोजित 'ड्रॉइंग रूम मीटिंग्स' ने भी राज्य विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत में अहम भूमिका निभाई। सूत्रों के मुताबिक, हरियाणा में संघ कार्यकर्ताओं की टोलियों ने चुनाव से पहले 1.25 लाख से अधिक छोटी समूह बैठकों का आयोजन किया। भाजपा ने हरियाणा विधानसभा में 90 में से 48 सीटों पर जीत दर्ज कर न केवल सत्ता बरकरार रखी बल्कि कांग्रेस की वापसी को भी रोक दिया।
नड्डा के बयान से निराश हुए थे आरएसएस कार्यकर्ता
ऐसा कहा जाता है कि इस साल लोकसभा चुनावों में भाजपा के कमजोर प्रदर्शन का एक कारण आरएसएस कार्यकर्ताओं में उत्साह की कमी थी। माना जाता है कि भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के बयान से संघ के कार्यकर्ता निराश हो गए थे।