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महाराणा प्रताप जयंती: इतिहास के पन्नों में वीरता का पर्याय बने, अकबर की सेना को चटाई धूल 

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Thu, 09 May 2019 12:15 PM IST
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महाराणा प्रताप - फोटो : social media

इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करवाने वाले वीर राजपूत राजा महाराणा प्रताप की आज 479वीं जयंती है। उनका जन्म नौ मई, 1540 के दिन हुआ था। वह मेवाड़ में सिसोदिया राजपूत राजवंश के राजा थे।

मुगलों को कई बार युद्ध में हराया

राजस्थान के कुंभलगढ़ में महाराणा उदयसिंह एवं माता राणी जयवंत कंवरी के घर जन्मे महाराणा ने कई सालों तक मुगल सम्राट अकबर के साथ संघर्ष किया। उन्होंने मुगलों को कई बार युद्ध में हराया भी। 

अकबर की दोस्ती के खिलाफ रहे

महाराणा प्रताप और अकबर दोनों ही तलवारें टकराने से पहले सुलह करना चाहते थे। इसके लिए हमेशा अकबर की ओर से पहल की गई, जबकि महाराणा प्रताप हमेशा ऐसी दोस्ती के खिलाफ रहे।

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महाराणा प्रताप - फोटो : social media
इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करवाने वाले वीर राजपूत राजा महाराणा प्रताप की आज 479वीं जयंती है। उनका जन्म नौ मई, 1540 के दिन हुआ था। वह मेवाड़ में सिसोदिया राजपूत राजवंश के राजा थे।

मुगलों को कई बार युद्ध में हराया

राजस्थान के कुंभलगढ़ में महाराणा उदयसिंह एवं माता राणी जयवंत कंवरी के घर जन्मे महाराणा ने कई सालों तक मुगल सम्राट अकबर के साथ संघर्ष किया। उन्होंने मुगलों को कई बार युद्ध में हराया भी। 

अकबर की दोस्ती के खिलाफ रहे

महाराणा प्रताप और अकबर दोनों ही तलवारें टकराने से पहले सुलह करना चाहते थे। इसके लिए हमेशा अकबर की ओर से पहल की गई, जबकि महाराणा प्रताप हमेशा ऐसी दोस्ती के खिलाफ रहे।

महाराणा प्रताप - फोटो : social media

दो लाख सैनिकों का 22 हजार ने किया मुकाबला

इतिहास के अनुसार अकबर ने साल 1576 में महाराणा प्रताप से लड़ाई करने का फैसला लिया था। लेकिन ये लड़ाई उतनी भी आसान नहीं थी। क्योंकि मुगल शासक के पास दो लाख सैनिक थे, जबकि राजपूत सेना में महज 22 हजार सैनिक थे।

हथियारों से खेलने का शौक

महाराणा को बचपन में कीका के नाम से पुकारा जाता था। वह अपने माता-पिता की पहली संतान थे। राजमहल में पले-बढ़े महाराणा बचपन से ही बहादुर और अपने लक्ष्यों को पाने का हौसला रखते थे। जिस उम्र में बच्चे खिलौनों से खेलते हैं, उस उम्र में वह हथियारों से खेलते थे।

महाराणा प्रताप - फोटो : social media

मान-सम्मान सबसे ऊपर

इतिहास कहता है कि महाराणा प्रताप को सबसे अधिक फिक्र मान-सम्मान की थी। उन्हें धन-दौलत और गहनों की कोई परवाह नहीं थी। वह कभी धन-दौलत गंवाने में पीछे नहीं रहे। लेकिन अपने मान-सम्मान को उन्होंने कभी झुकने नहीं दिया। 

पूरे मेवाड़ पर किया राज

महाराणा प्रताप ने 1582 में दिवेर में एक भयानक युद्ध में भाग लिया। इस युद्ध में उन्होंने मुगलों को धूल चटाई थी। महाराणा ने चावंड को 1585 में अपनी राजधानी घोषित कर दिया। उन्होंने चित्तौड़गढ़, मांडलपुर को छोड़कर पूरे मेवाड़ पर राज किया था।



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