फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

SC: 'घटना दुर्भाग्यपूर्ण, हाईकोर्ट जाएं याचिकाकर्ता', सुप्रीम कोर्ट में महाकुंभ हादसे से जुड़ी याचिका खारिज

Mon, 03 Feb 2025 12:50 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

याचिका में केंद्र और सभी राज्यों को पक्षकार बनाते हुए केंद्र तथा राज्य सरकारों को महाकुंभ में श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक रूप से काम करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुप्रीम कोर्ट ने प्रयागराज के महाकुंभ में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशिष्ट दिशा-निर्देश नियमों के क्रियान्वयन की मांग वाली जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के इस बयान पर संज्ञान लिया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में पहले ही याचिका दायर की जा चुकी है। कोर्ट ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और याचिकाकर्ता से हाईकोर्ट जाने को कहा। दरअसल, 29 जनवरी को प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में हुई भगदड़ में 30 की मौत हो गई थी और 60 अन्य लोग घायल हो गए थे।

विज्ञापन


मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने वकील विशाल तिवारी की जनहित याचिका पर सुनवाई की। याचिका में भगदड़ की घटनाओं को रोकने और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत समानता व जीवन के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने की मांग की गई थी। शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी की इन दलीलों पर गौर किया कि न्यायिक जांच शुरू की गई है।

केंद्र और सभी राज्यों को पक्षकार बनाया गया था
याचिका में केंद्र और सभी राज्यों को पक्षकार बनाते हुए केंद्र तथा राज्य सरकारों को महाकुंभ में श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक रूप से काम करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया था कि महाकुंभ जैसे आयोजनों में वीआईपी मूवमेंट को सीमित किया जाए और ज्यादा से ज्यादा जगह आम आदमी के लिए रखी जाए। सभी राज्यों को सुरक्षा संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने तथा आपात स्थिति में अपने-अपने निवासियों की सहायता के लिए प्रयागराज में सुविधा केंद्र स्थापित करने चाहिए।
विज्ञापन


कई भाषाओं में साइनेज और अनाउंसमेंट कराने की भी मांग
जनहित याचिका में श्रद्धालुओं को कार्यक्रम में आसानी से पहुंचने में मदद के लिए कई भाषाओं में साइनेज और अनाउंसमेंट कराने की भी मांग की गई थी। याचिका में कहा गया था कि उपस्थित लोगों को सुरक्षा प्रोटोकॉल के बारे में बताने के लिए एसएमएस और व्हाट्सएप संदेशों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

यूएपीए संशोधन...सुनवाई से इन्कार मामले को दिल्ली हाईकोर्ट भेजा
सुप्रीम कोर्ट ने उन याचिकाओं को सुनने से इनकार कर दिया, जो गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के संशोधन के खिलाफ दायर की गई थीं। इन संशोधनों के तहत राज्य को व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करने और उसकी संपत्ति जब्त करने का अधिकार दिया गया है। चीफ जस्टिस (सीजेआई) संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने इस मामले को दिल्ली हाईकोर्ट को भेजने का निर्णय लिया। कोर्ट ने कहा, हम पहले इस मामले की सुनवाई नहीं कर सकते। ऐसे मामलों में कई जटिल समस्याएं होती हैं और कभी-कभी याचिकाकर्ता या सरकार की तरफ से कुछ मुद्दे छूट जाते हैं, फिर हमें इसे बड़ी बेंच के पास भेजना पड़ता है। इसलिए, इसे पहले हाईकोर्ट की ओर से हल किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने 6 दिसंबर 2019 को यूएपीए संशोधन की सांविधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था। 

पूर्व प्रभाव से लागू होगा मुआवजा-ब्याज आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएसएआई) कानून के तहत किसानों से अधिगृहीत भूमि के मुआवजे और ब्याज के बारे में उसका 2019 का फैसला पूर्व प्रभाव से लागू होगा। जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने इस फैसले को उत्तरव्यापी रूप से लागू करने की मांग वाली एनएसएआई की याचिका खारिज कर दी। एनएसएआई ने कहा था कि जिन मामलों में भूमि अधिग्रहण हो चुका है और मुआवजे को अंतिम रूप दिया जा चुका है उन मामलों को फिर से न खोला जाए।

एनकाउंटर के सभी मामलों की जांच संभव नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह मई, 2021 से अगस्त, 2022 तक असम में कथित 171 पुलिस मुठभेड़ों के गुण-दोष पर विचार नहीं कर सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन मामलों में वह सिर्फ यह देख सकता है कि शीर्ष अदालत के दिशानिर्देशों का उचित रूप से पालन किया गया था या नहीं। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने याचिकाकर्ता आरिफ मोहम्मद की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण के तर्क सुनने के बाद सुनवाई एक सप्ताह के लिए स्थगित कर दी।

शव से यौन क्रिया को दुष्कर्म प्रावधानों में शामिल करने की याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को शव के साथ यौन क्रिया को दुष्कर्म के प्रावधान में शामिल करने की कर्नाटक सरकार की याचिका को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने 30 मई, 2023 के अपने फैसले में नेक्रोफीलिया (शव के साथ यौन क्रिया) को दुष्कर्म मानने से इन्कार कर दिया था। शीर्ष अदालत ने कहा कि कानून में बदलाव संसद को करना है, राज्य इस संबंध में अपना पक्ष रख सकता है। जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने राज्य सरकार की दलील को खारिज कर दिया।

हत्यारे हवारा की जेल बदलने की याचिका का विरोध
पंजाब सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में जगतार सिंह हवारा की उस याचिका का विरोध किया जिसमें उसने खुद को दिल्ली की तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी जेल में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है। हवारा 1995 में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। पीठ ने हवारा की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोंजाल्विस से पूछा कि क्या इस याचिका में केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ को भी पक्षकार बनाया गया है। गोंजाल्विस ने कहा कि वह चंडीगढ़ को भी पक्षकार बनाएंगे। पीठ ने अनुमति देते हुए केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन को नोटिस जारी करके चार सप्ताह के भीतर हवारा की याचिका पर जवाब मांगा।
विज्ञापन

निर्विरोध चुनाव प्रक्रिया के खिलाफ याचिका पर 19 मार्च को सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के एक प्रावधान को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए 19 मार्च की तारीख तय की है। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम का एक प्रावधान मतदाताओं को अकेले उम्मीदवार के मामले में नोटा विकल्प चुनने से रोकता है। कोर्ट की जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एनके सिंह की पीठ ने केंद्र से जवाब मांगा है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें