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Mahakumbh: संस्कृत पाठ करने वाले विदेशियों के आश्रम से नागा साधुओं के रहस्यों तक, देखें महाकुंभ की खास कवरेज

Fri, 24 Jan 2025 05:56 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

अमर उजाला आपको कुछ जबरदस्त तस्वीरों और विशेष खबरों के माध्यम से महाकुंभ के अद्भुत नजारों को दिखा रहा है।
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महाकुंभ 2025। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में जारी महाकुंभ पूरे देश को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। इस आयोजन की छटा इतनी निराली है कि देश के सभी राज्यों से लेकर देश-विदेश से लोग महाकुंभ में संगम पर स्नान के लिए पहुंच रहे हैं।
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ऐसे में अमर उजाला आपको कुछ जबरदस्त तस्वीरों और विशेष खबरों के माध्यम से महाकुंभ के अद्भुत नजारों को दिखा रहा है...

स्नान के लिए जाते हुए साधु - फोटो : अमर उजाला
1. महाकुंभ का अनोखा आश्रम: यहां सभी महामंडलेश्वर विदेशी, बोलते फर्राटेदार संस्कृत; पूरी तरह भारतीय रंग में रंगे
कुंभ मेला के सेक्टर-17 में स्थित शक्तिधाम महाकुंभ का सबसे अनोखा आश्रम है। यह एक मात्र ऐसा आश्रम है, जहां आश्रम के नौ महामंडलेश्वर विदेशी हैं। ये हिंदी सही से नहीं बोल पाते, लेकिन फर्राटेदार संस्कृत में पाठ करते हैं। शक्तिधाम आश्रम में नौ महामंडलेश्वर विदेश से ताल्लुक रखते हैं। इनमें से एक ही महामंडलेश्वर हिंदी में बात करते हैं। पढ़ें पूरी खबर...

Mahakumbh 2025 - फोटो : अमर उजाला
2. Mahakumbh 2025: अठखेलियां, शैतानी व खुद को भूलकर किया जाने वाला आलिंगन, जब एक नागा की 'मां' से होती है मुलाकात

सनातन का अर्थ होता है, शाश्वत या 'सदा बना रहने वाला', यानी जिसका न आदि है न अंत। इसके लिए जीना और इसी के लिए प्राण त्याग देना, ये नागाओं के जीवन का लक्ष्य होता है। खुद का पिंडदान करने वाले और सबकुछ त्याग देने वाले नागा सनातन की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। लेकिन एक बात हमेशा से कौतूहल का विषय रही है कि जब नागा संन्यासी शाही स्नान का हिस्सा बनते हैं तो अचानक से उनके भाव में बदलाव क्यों आ जाता है। पढ़ें पूरी खबर...

महाकुंभ 2025 - फोटो : अमर उजाला
3. Mahakumbh 2025: कुंभ की गलियों में गूगल भी रास्ता भूला, सेक्टर का गणित समझिए ताकि न हो परेशानी

मौनी अमावस्या के स्नान की तारीख करीब है और श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में पुलिस प्रशासन प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या में बदलाव के आधार पर मार्ग को खोलने और बंद करने का काम कर रहा है। इससे हो यह रहा है कि जिन लागों को जानकारी नहीं है वो गूगल मैप का प्रयोग कर रहे हैं और रास्तों के जाल में उलझ जा रहे हैं। इसके साथ ही उन लोगों को भी और असुविधा का सामना करना पड़ रहा है जो लोग पांटून पुल पर होते हैं। वहां से लोकेशन में मैप का प्रयोग करने पर कई बार दिखाता है कि आप नदी में है। पढ़ें पूरी खबर...

कैसे एक आम इंसान बनता है अघोरी साधु - फोटो : Adobe Stock
4. Maha kumbh 2025: कैसे बनते हैं अघोरी साधु और किसकी करते हैं साधना? जानिए कैसी होती है इनकी रहस्यमयी दुनिया

प्रयागराज में संगम तट दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक मेला महाकुंभ चल रहा है। गंगा, युमना और सरस्वती नदी के त्रिवेणी संगम तट पर लाखों संख्या में साधु संत पहुंचे हैं। अभी तक संगम में 11 करोड़ से ज्यादा लोग पवित्र डुबकी लगा चुके हैं। 13 जनवरी 2025 से शुरू हुआ महाकुंभ 26 फरवरी 2025 तक चलेगा। संगम में स्नान करने के लिए साधु-संतों के अलावा दुनियाभर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक, महाकुंभ में करीब 45 करोड़ लोगों के पहुंचने की संभावना है। पढ़ें पूरी खबर...

सुधा मूर्ति - फोटो : अमर उजाला
5. Sudha Murthy In Mahakumbh: सुधा मूर्ति बोलीं... तन-मन-धन से गिरे को अंगुली पकड़कर उठाना ही मेरे लिए धर्म

सादगी की मूर्ति...नाम भी है सुधा मूर्ति। सर्द हवाओं की चुभन के बीच हरे रंग की साड़ी, पूरी बाजू वाले स्लेटी कलर के स्वेटर और क्रीम कलर का शॉल लपेटे सुधाजी जब पर्यटन निगम की टेंट सिटी की कॉटेज नंबर-16 का पर्दा हटाकर बाहर आईं तो राज्यसभा सदस्य, पद्मभूषण व पद्मश्री जैसे सम्मान और ओहदे उनकी सादगी के कारण सामान्य से लगने लगे। पढ़ें पूरी खबर...

महाकुंभ में लगी प्रदर्शनी में लगी गाजियाबाद जेल में बनाई गई पेंटिंग। - फोटो : अमर उजाला।
6. Mahakumbh : हैरान कर रहा सलाखों में कैद हाथों का हुनर, 27 जेलों में बने 150 उत्पादों की लगाई गई प्रदर्शनी

वो भले ही सलाखों के पीछे कैद हों, लेकिन उनके हुनर की उड़ान अभी बाकी है। फिर चाहे वह गाजियाबाद जेल के बंदी की महाकुंभ आधारित पेंटिंग हो या नैनी के बंदियों की ओर से तैयार किया गया वुडन मंदिर, यहां मौजूद हर उत्पाद नजर पड़ते ही मानो यही संदेश देता है। पढ़ें पूरी खबर...

इसरो ने जारी की महाकुंभ की तस्वीरे। - फोटो : अमर उजाला।
7. Mahakumbh : इसरो ने जारी कीं महाकुंभ टेंट सिटी संगम की तस्वीरें, वेबसाइट पर भी साझा किया चित्र

महाकुंभ नगर (यूपी)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बुधवार को महाकुंभ टेंट सिटी की पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीरें जारी कीं। तस्वीरें महाकुंभ की भव्यता की झलक दिखाती हैं। इसमें दुनिया भर से करोड़ों लोग संगम में पवित्र डुबकी लगाने के लिए आ रहे हैं। महाकुंभ, हर 12 साल में आयोजित होने वाला एक बड़ा धार्मिक आयोजन है, जो 13 जनवरी से प्रयागराज में शुरू हुआ और 26 फरवरी (45 दिनों) तक चलेगा। अब तक आठ करोड़ से अधिक तीर्थयात्री संगम में पवित्र डुबकी लगा चुके हैं। पढ़ें पूरी खबर...

महाकुंभ का विहंगम नजारा। - फोटो : अमर उजाला।
8. MahaKumbh: एक लाख सनातनियों तक पहुंचेगी हिंदू आचार संहिता, शादी पर फिजूलखर्ची और महिलाओं पर ये है नियम; पढ़ें

महाकुंभ में पहली बार एक लाख सनातनियों में हिंदू आचार संहिता होगी। काशी के विद्वानों द्वारा तैयार आचार संहिता पर शंकराचार्य, रामानुजाचार्य और संतों की मुहर लगने के बाद इसे लोगों तक पहुंचाया जाएगा। पढ़ें पूरी खबर...

9. Interview : साध्वी भगवती सरस्वती- एकता का संदेश देता है महाकुंभ, नहीं तो करोड़ों लोग एक साथ स्नान नहीं करते

अमेरिका में पली-बढ़ीं और भारत में संन्यासी बनकर महिला सशक्तीकरण और बच्चों की शिक्षा पर काम करने वाली साध्वी भगवती सरस्वती कहती हैं कि महाकुंभ एकता का संदेश देता है। यह हमें एक-दूसरे के साथ जोड़ता है। तभी तो करोड़ों लोग खुले आसमां के नीचे एक साथ स्नान करते हैं। नहीं तो कोई महिला इतने लोगों के बीच में कैसे स्नान कर सकती है। यह दर्शाता है कि हम सब एक परिवार हैं। महाकुंभ के सेक्टर 23 स्थित परमार्थ के शिविर में साध्वी भगवती सरस्वती से बातचीत की नीरज मिश्रा ने। पढ़ें पूरी खबर...
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महाकुंभ 2025 - फोटो : अमर उजाला
10. Mahakumbh 2025: बहुत कुछ कहती हैं संगम नगरी की दीवारें, कुछ और भी बोलें इसकी तैयारी में 'आरती'

जब आप संगम नगरी में होते हैं तो आपको कई जगह ऐसे बच्चे दिख जाते है जो अभी भी संगम नगरी की दीवारों को सुंदर बनाने में लगे हुए हैं। सड़क पर चलते हुए मेरी मुलाकात एक बच्ची से हुई। जब मैं उसके पास गया तो वह बड़ी तल्लीनता से अपने काम को करती नजर आई। मैंने उससे पूछा बेटा आपका नाम क्या है तो उसने बताया आरती। उसके साथ कई और बच्चे भी थे जो इस काम में लगे हुए थे। उन्होंने बताया कि वो इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में फाइन आर्ट की छात्राएं हैं। आरती उन सबके साथ तो थी लेकिन वह फाइन आर्ट की छात्रा नहीं थी, उसे बस इस काम को करना अच्छा लगता है। अन्य बच्चों में जया, दीपिका और उनका एक साथी अखिलेश भी था। पढ़ें पूरी खबर...
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