गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोदी सावंत ने कहा कि सभी को एकजुट होना चाहिए। महादयी नदी हमारे लिए एक जीवन रेखा है। मैं फिर से दोहराता हूं, महादयी मेरे लिए मां की तरह है। सावंत ने कहा कि डीपीआर के लिए दी गई मंजूरी सैद्धांतिक रूप से है क्योंकि कर्नाटक को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से अनुमति लेनी होगी।
महादयी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर गोवा और कर्नाटक सरकार के बीच मतभेद कम होता नजर नहीं आ रहा है। इस मामले पर अब गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि वह कर्नाटक को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के लिए केंद्र द्वारा दी गई मंजूरी का विरोध करते हुए जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मिलने के लिए एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे।
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सावंत ने सोमवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई की घोषणा के बाद इस मुद्दे पर चर्चा के लिए एक विशेष कैबिनेट बैठक बुलाई थी, जिसमें केंद्र ने महादयी नदी पर दो बांधों की डीपीआर को मंजूरी दे दी थी। सावंत ने कहा कि गोवा सरकार महादयी नदी के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेगी। कलसा और भांडुरा में बांधों के निर्माण से उत्तरी गोवा जिले में रहने वाले लोगों की पेयजल आवश्यकता प्रभावित होगी।
सावंत ने कहा कि सभी को एकजुट होना चाहिए। महादयी नदी हमारे लिए एक जीवन रेखा है। मैं फिर से दोहराता हूं, महादयी मेरे लिए मां की तरह है। सावंत ने कहा कि डीपीआर के लिए दी गई मंजूरी सैद्धांतिक रूप से है क्योंकि कर्नाटक को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से अनुमति लेनी होगी। सावंत ने जोर देकर कहा कि यह (एमओईएफएंडसीसी) मंजूरी संभव नहीं होगी क्योंकि महादयी नदी एक वन्यजीव अभयारण्य से होकर गुजरती है।