कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र की भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि परिसीमन भाजपा की साजिश है। उन्होंने कहा कि परिसीमन का मकसद लोगों को उनके अधिकारों से वंचित करना और तमिलनाडु के लोगों की राजनीतिक ताकत छीनना है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने तमिलनाडु के महाबलीपुरम में मीडिया से बात करते हुए केंद्र सरकार पर करारा हमला बोला है। उन्होंने कहा, 'भाजपा परिसीमन करने की कोशिश कर रही है। परिसीमन का मकसद लोगों को उनके अधिकारों से वंचित करना और तमिलनाडु के लोगों की राजनीतिक ताकत छीनना है। यह भाजपा की साजिश है... जो कोई भी परिसीमन का समर्थन करता है, वह तमिलनाडु और उसके भविष्य के साथ धोखा कर रहा है, और आरएएसएस व भाजपा को तमिलनाडु के लोगों और उनके भविष्य पर हमला करने का मौका दे रहा है।
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#WATCH | Mahabalipuram, Tamil Nadu | Lok Sabha LoP and Congress MP Rahul Gandhi says, "...There is an attempt by the BJP to carry out delimitation. Delimitation is designed to disenfranchise people and take away the political power of the people of Tamil Nadu. This is a BJP… pic.twitter.com/fygVA9f9vh
तमिल व्यक्ति न करें परिसीमन का समर्थन- राहुल
राहुल गांधी ने आगे कहा कि ऐसा व्यक्ति 21वीं सदी का 'एट्टप्पन' है। किसी भी तमिल व्यक्ति को परिसीमन का समर्थन नहीं करना चाहिए। हर तमिल व्यक्ति को परिसीमन का विरोध करना चाहिए। हर तमिल पार्टी और हर राष्ट्रीय पार्टी को सदन में परिसीमन को हराना चाहिए'।
डिलिमिटेशन बिल को फिर से लाने की चर्चा तेज
यह बयान ऐसे समय आया है जब संसद में डिलिमिटेशन बिल को फिर से लाने की चर्चा तेज है। इस प्रस्ताव के तहत लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 तक करने और महिलाओं को 33% आरक्षण देने की योजना है। वहीं, इस मुद्दे पर दक्षिण भारत की पार्टियों की चिंताएं भी सामने आई हैं। डीएमके नेता टीकेएस इलंगोवन ने कहा है कि अगर इस प्रक्रिया से दक्षिणी राज्यों की सीटों पर असर नहीं पड़ता, तो इस पर अलग-अलग सुझाव दिए जा सकते हैं। फिलहाल, डिलिमिटेशन को लेकर राजनीतिक माहौल गरम है और आने वाले समय में इस पर संसद में बड़ी बहस होने की संभावना है।
कौन था एट्टप्पन? जिसका राहुल ने किया जिक्र
एट्टप्पन तमिल इतिहास का एक विवादास्पद नाम है। एट्टप्पन को आमतौर पर वीर स्वतंत्रता सेनानी वीरपांडिया कट्टबोम्मन के साथ विश्वासघात करने वाले व्यक्ति के तौर पर जाना जाता है। 18वीं शताब्दी के अंत में अंग्रेजों और स्थानीय पालयक्कर शासकों के बीच संघर्ष चल रहा था। इतिहास के अनुसार, एट्टप्पन ने कट्टबोम्मन की गतिविधियों की जानकारी अंग्रेजों को दी, जिससे उन्हें गिरफ्तार करने में मदद मिली। 1799 में कट्टबोम्मन को अंग्रेजों ने फांसी दे दी। इसी कारण तमिल संस्कृति में 'एट्टप्पन' नाम विश्वासघात का पर्याय बन गया है। हालांकि इस विषय पर इतिहासकारों के बीच अलग-अलग मत मौजूद हैं।