सार
भारतीय गैर-लाभकारी संस्था एजुकेट गर्ल्स को 2025 का प्रतिष्ठित रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड मिला है। सेफीना हुसैन द्वारा स्थापित इस संस्था ने अब तक 20 लाख से अधिक लड़कियों को शिक्षा से जोड़ा है। राजस्थान से शुरू हुई पहल अब देशभर के 30,000 से अधिक गांवों तक पहुंच चुकी है।
स्कूली छात्राएं (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
मनीला में रविवार को घोषित 2025 के रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड की सूची में भारत की गैर-लाभकारी संस्था एजुकेट गर्ल्स का नाम शामिल किया गया है। यह पहली बार है जब किसी भारतीय संगठन को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार मिला है। संस्था को लड़कियों और युवतियों की शिक्षा के क्षेत्र में अहम योगदान के लिए सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार एशिया का ‘नोबेल प्राइज’ माना जाता है।
एजुकेट गर्ल्स की स्थापना 2007 में सेफीना हुसैन ने की थी। वह लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई कर चुकी हैं और अमेरिका में काम करने के बाद भारत लौटीं। संस्था ने राजस्थान से काम शुरू किया और सबसे पिछड़े इलाकों में उन लड़कियों को स्कूल से जोड़ा, जो पढ़ाई से वंचित थीं। संस्था ने उन्हें उच्च शिक्षा और रोजगार तक पहुँचाने के लिए लगातार प्रयास किया। अब तक 20 लाख से ज्यादा लड़कियों को इस पहल से फायदा मिला है।
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नवाचार और कार्यक्रम
2015 में संस्था ने दुनिया का पहला डेवलपमेंट इंपैक्ट बॉन्ड शिक्षा के क्षेत्र में शुरू किया। इसके जरिए वित्तीय सहायता को परिणामों से जोड़ा गया। शुरुआत 50 पायलट गांवों से हुई थी और अब यह पहल भारत के 30,000 से अधिक गांवों में फैल चुकी है। संस्था का रिटेंशन रेट 90 फीसदी से ऊपर है। इसके अलावा प्रगति नामक कार्यक्रम के जरिए 15 से 29 साल की युवतियों को ओपन स्कूलिंग की सुविधा दी जाती है। अब तक इसमें 31,500 से अधिक लड़कियां शामिल हो चुकी हैं।
अन्य विजेता और समारोह
इस साल के मैग्सेसे अवॉर्ड के अन्य विजेताओं में मालदीव की शाहिना अली और फिलीपींस के फ्लावियानो एंटोनियो एल विलनुएवा शामिल हैं। अली को समुद्री पारिस्थितिकी की रक्षा के काम के लिए और विलनुएवा को गरीबों और शोषितों की गरिमा बनाए रखने के लिए सम्मानित किया गया है। अवॉर्ड समारोह सात नवंबर को मनीला के मेट्रोपॉलिटन थिएटर में आयोजित होगा। सभी विजेताओं को मेडल, प्रमाणपत्र और नकद पुरस्कार दिया जाएगा।
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भारत के लिए गौरव का क्षण
सेफीना हुसैन ने इस उपलब्धि को ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार भारत की लड़कियों की शिक्षा के लिए चलाए जा रहे जन-आंदोलन को वैश्विक पहचान दिलाता है। इससे पहले भारत से मदर टेरेसा, जयप्रकाश नारायण, सत्यजीत रे, अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी और रविश कुमार जैसे नाम मैग्सेसे अवॉर्ड पा चुके हैं। अब एजुकेट गर्ल्स का नाम इस सूची में शामिल होना देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।