मद्रास हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि हिंदू विवाह अधिनियम में ट्रांसवुमन भी 'दुल्हन' है। विवाह अधिनियम में दी परिभाषा जरूरी नहीं कि केवल एक महिला के संदर्भ में ही हो। जस्टिस जीआर स्वीमानाथन ने एक पुरुष और एक ट्रांसवुमन की ओर से दायर याचिका पर यह फैसला दिया। अधिकारियों ने पिछले साल तूतीकोरिन में हुई उनकी शादी को पंजीकृत करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद इन दोनों ने याचिका दायर की।
इस पर सोमवार को सुनवाई करते हुए जस्टिस स्वामीनाथन ने पंजीकरण विभाग के अधिकारियों को याचिकाकर्ताओं की शादी पंजीकृत करने का निर्देश दिया। स्वामीनाथन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और महाभारत, रामायण का हवाला देते हुए कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम में दिए 'दुल्हन' शब्द का अर्थ सीमित नहीं हो सकता। दुल्हन शब्द सिर्फ एक महिला के लिए नहीं, बल्कि एक ट्रांसवुमन के लिए भी इस्तेमाल होगा।
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