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सलाह: मद्रास हाईकोर्ट ने कहा, दुर्घटनाएं रोकने के लिए दोपहिया वाहनों में भी लगे स्पीड गवर्नर

Thu, 22 Apr 2021 03:08 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, चेन्नई

सार

  • कोर्ट ने कहा, वाहन निर्माण के दौरान ही कंपनियां उठाए यह कदम
  • यह सिफारिश एक दुर्घटना में मारी गई लड़की के परिजनों की तरफ से मांगे गए मुआवजे पर सुनवाई के दौरान की
  • स्पीड ब्रेकरों को लगाते समय सड़क सुरक्षा मानकों का ध्यान रखना चाहिए, ताकि वे दुर्घटनाओं के ‘ब्लैक स्पॉट’ ना साबित हों
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मद्रास हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को राज्य और केंद्र सरकारों को सुझाव दिया कि सड़क दुर्घटनाएं रोकने के लिए दोपहिया वाहनों में भी स्पीड गवर्नर लगवाए जाएं। इसके लिए सरकार ऑटोमोबाइल कंपनियों को दोपहिया वाहनों के उत्पादनों के दौरान ही उनमें गति को नियंत्रित करने वाला यह उपकरण लगाने का निर्देश दे सकती हैं। मामले की अगली सुनवाई दो अगस्त को होगी।

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जस्टिस एन किरुबाकरान और जस्टिस अब्दुल कुद्दुस की खंडपीठ ने सरकार से यह सिफारिश एक दुर्घटना में मारी गई लड़की के परिजनों की तरफ से मांगे गए मुआवजे पर सुनवाई के दौरान की। पीठ ने मुआवजा बढ़ाने का अपने आदेश में यह भी कहा कि ड्राइविंग लाइसेंस मांगने वालों को उन अस्पतालों में लेकर जाना चाहिए, जहां दुर्घटना में घायल होने वालों का इलाज किया जा रहा हो ताकि वे पहली बार में ही सड़क नियमों के उल्लंघन से होने वाले अपने नुकसान को अच्छी तरह समझ सकें।

पीठ ने कहा, सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए आधुनिक उपकरणों जैसे स्पीड गवर्नर, गति संकेतक डिस्प्ले का उपयोग किया जा सकता है। साथ ही तेज रफ्तार वाहनों को ड्रोन की मदद से तलाशकर ड्राइवरों को कठोर सजा दी जा सकती है। आयातित वाहनों को अपनी गति कम करने के लिए कैलिब्रेट करना चाहिए। साथ ही स्पीड ब्रेकरों को लगाते समय सड़क सुरक्षा मानकों का ध्यान रखना चाहिए, ताकि वे दुर्घटनाओं के ‘ब्लैक स्पॉट’ ना साबित हों।
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18 लाख से बढ़ाकर 1.5 करोड़ किया मुआवजा
मद्रास हाईकोर्ट ने यह फैसला एक लड़की के पिता की उस अपील पर किया, जिसमें निचली अदालत की तरफ से 18.44 लाख रुपये मुआवजा तय किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी। युवती को अप्रैल, 2013 में एक सड़क दुर्घटना में घातक चोट आई थी। युवती को मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (एमटीसी) की बस ने टक्कर मार दी थी।

हाईकोर्ट ने युवती के पिता को 1.5 करोड़ रुपये का मुआवजा दिए जाने का आदेश दिया है। पीठ ने इस बात पर गौर किया कि मेडिकल बोर्ड ने युवती की जांच की थी और हमेशा के लिए शरीर का 90 फीसदी हिस्सा बेकार हो जाने की पुष्टि की थी। पीठ ने कहा कि युवती अब कभी खुद कोई काम नहीं कर पाएगी और ताउम्र दूसरों पर निर्भर रहेगी। पीड़िता की इसी दयनीय स्थिति को ध्यान में रखकर पीठ ने मुआवजा बढ़ाने का आदेश दिया।

यातायात अपराधों के लिए बने विशेष अदालतें
हाईकोर्ट ने यह भी सलाह दी कि यातायात से जुड़े अपराधों और दुर्घटना मुआवजा मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का गठन होना चाहिए। सरकारों को सड़क जागरूकता फैलाने के लिए विभिन्न सेलीब्रेटी की मदद लेनी चाहिए। साथ ही लाइसेंस बनवाने आए लोगों के लिए विशेषज्ञों, डॉक्टरों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के व्याख्यानों का भी आयोजन कराना चाहिए।

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