मद्रास हाईकोर्ट ने शनिवार को कहा, यौन उत्पीड़न की शिकार नाबालिग पीड़िता के शरीर पर चोट के निशान नहीं हैं तो इसका यह मतलब नहीं कि उससे ज्यादती नहीं हुई। इसके साथ ही निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए हाईकोर्ट ने दोषी को 10 वर्ष सश्रम कारावास और पॉक्सो कानून के तहत सात साल सश्रम कैद की सजा कायम रखी।
जस्टिस वैद्यनाथन ने कहा, नाबालिग ने इरोड के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान में अपने साथ हुई ज्यादती बताई है। उसने बताया कि जब आरोपी ने उसे छुआ तो उसके कपड़ों पर कुछ तरल पदार्थ गिरा। जिसे देखकर वह घर से बाहर भाग गई। जज ने कहा, पीड़िता के बयान से नहीं लगता कि उसे किसी ने कुछ सिखाया है।
पीड़िता की मां ने 27 मई 2016 को शिकायत की थी कि प्रकाश उनकी 12 साल की बेटी को अपने घर ले गया और यौन उत्पीड़न किया। सुनवाई के बाद निचली अदालत ने प्रकाश को दोषी करार देते हुए आईपीसी के तहत दस साल सश्रम कारावास और पॉक्सो कानून के तहत सात साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। दोनों सजाएं साथ चलनी हैं।