कॉफी या फिर चाय में रोजाना कृत्रिम मिठास (सुक्रालोज ) की थोड़ी मात्रा लेने से कोई नुकसान नहीं होता। यह जानकारी मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन के अध्ययन में सामने आई है। इसमें करीब 210 लोगों पर 12 सप्ताह तक परीक्षण किया गया। मधुमेह रोगियों में सुक्रालोज को लेकर यह देश का पहला अध्ययन है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, भारतीयों में चाय या फिर कॉफी को लेकर काफी अधिक लगाव है। इनमें टेबल शुगर (सुक्रोज) को आर्टिफिशियल स्वीटनर सुक्रालोज से बदलने के प्रभाव का पता लगाने के लिए यह अध्ययन किया है। इस दौरान टाइप 2 मधुमेह रोगियों में कार्डियो मेटाबोलिक जोखिम कारकों पर सुक्रालोज के प्रभाव का आकलन किया गया।
डब्ल्यूएचओ ने किया है आगाह
यह अध्ययन ऐसे समय में सामने आया है, जब डब्ल्यूएचओ ने शरीर के वजन को नियंत्रित करने के लिए सुक्रालोज का उपयोग करने के प्रति आगाह किया है। मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. वी. मोहन का कहना है कि डब्ल्यूएचओ की चेतावनी मुख्य रूप से उन लोगों के लिए थी जो मधुमेह से पीड़ित नहीं हैं और वजन कम करने की कोशिश के लिए डाइट कोला या अन्य पदार्थों में बड़ी मात्रा में सुक्रालोज का सेवन करते हैं। एजेंसी
60 कैलोरी मात्रा पर्याप्त
अध्ययन में देश के टाइप 2 मधुमेह रोगियों के प्रतिदिन 60 कैलोरी अतिरिक्त सुक्रालोज की मात्रा से मरीजों में ग्लूकोज या फिर एचबीए1सी के स्तर में कोई बदलाव नहीं देखा गया। दूसरी ओर अध्ययन में शरीर के वजन, कमर की परिधि (डब्ल्यूसी) और बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) में मामूली सुधार देखा गया। यह अध्ययन इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत में मधुमेह रोगी अपनी कॉफी और चाय में अतिरिक्त चीनी का उपयोग करते हैं, जिससे यह पेय पदार्थ चीनी सेवन का एक दैनिक स्रोत बन जाते हैं। इसके अलावा, भारत की कुल कार्बोहाइड्रेट खपत बहुत अधिक है। इसका मतलब है कि यहां विशेष रूप से सफेद चावल या परिष्कृत गेहूं काफी खाया जाता है, जिसकी वजह से टाइप 2 मधुमेह का जोखिम बढ़ता है।
भारतीयों की आहार संबंधी आदतें अलग
डॉ. मोहन के मुताबिक, यह अध्ययन भारत के लिए बहुत प्रासंगिक है, क्योंकि भारतीयों की आहार संबंधी आदतें दुनिया के बाकी हिस्सों की तुलना में काफी भिन्न हैं। आमतौर पर भारत में सुक्रालोज का उपयोग चाय या कॉफी में शुगर की जगह किया जाता है। इससे कैलोरी, चीनी का सेवन कम करने और आहार अनुपालन बढ़ाने में मदद मिलती है। हालांकि, चाय और कॉफी में तय मात्रा के बीच इसका इस्तेमाल सुरक्षित है।