मध्यप्रदेश में हिंसक हो चुके किसान आंदोलन को थामने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कमान संभाल ली है। कल छह जून को ही उन्होंने इसके बाबत कृषि मंत्री राधामोहन सिंह और केन्द्रीय गृहमंत्रालय को ताकीद किया था। प्रधानमंत्री की चिंता पर अमल करते हुए कृषि मंत्री ने तत्काल मध्यप्रदेश सरकार से चर्चा की थी और केन्द्रीय गृहमंत्री ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से जानकारी ली थी।
सूत्र बताते हैं कि बुधवार सात जून को प्रधानमंत्री ने केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह, भूतल परिवहन एवं जहाजरानी मंत्री नितिन गडक़री के साथ अलग से बात की है। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने इसके बाबत तत्काल हर संभव कदम उठाने के लिए कहा है।
प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्र बताते हैं कि पीएम मोदी कल देर शाम से ही हालात पर नजर बनाए हैं। उन्हें राज्य में किसानों के आंदोलन तथा उससे निबटने के तरीकों को लेकर गहरी पीड़ा है। ऐसा माना जा रहा है कि कहीं न कहीं इस पूरे मामले में राज्य सरकार से लापरवाही हुई है। इसलिए केन्द्र सरकार इस मामले में अब किसी तरह की कोताही बरतने के पक्ष में नहीं है। वैसे भी केन्द्र सरकार किसानों के मुद्दे पर काफी संवेदनशील है।
ऐसे मामले की गंभीरता को समझते हुए केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से बात की और उन्हें हर संभव केन्द्रीय सहायता देने का भरोसा दिया। कल राजनाथ सिंह मुंबई जा रहे हैं। शुक्रवार को उनका राजस्थान जाने का कार्यक्रम है, लेकिन यदि मध्यप्रदेश में किसान आंदोलन के हालात यूं ही बने रहे तो वह अपना कार्यक्रम बदल सकते हैं। वहीं, राधा मोहन सिंह का 12-13 जून को मध्यप्रदेश जाने का कार्यक्रम है। समझा जा रहा है कि इस दौरान कृषि मंत्री किसानों को राहत देने के लिए कुछ बड़ी घोषणा कर सकते हैं।
केन्द्रीय गृहमंत्रालय के प्रवक्ता के एस धतवालिया के अनुसार मध्यप्रदेश के किसान आंदोलन से कानून-व्यवस्था को लेकर पैदा हुई स्थिति की केन्द्र सरकार ने बुधवार को समीक्षा की और राज्य सरकार की मांग को ध्यान में रखकर एहतियात के तौर पर केन्द्रीय अर्ध सैनिक बलों की 11 कंपनी को भेजने का निर्णय लिया है। केन्द्र सरकार का मानना है कि गुरुवार से राज्य में हालात काबू में आने की पूरी उम्मीद है।