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Madhya Pradesh: नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता और माता-पिता का गर्भपात कराने से इनकार, हाईकोर्ट ने बंद किया मामला

Sat, 14 Jun 2025 04:49 PM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक दुष्कर्म पीड़िता के गर्भपात में देरी को लेकर दायर याचिका का निपटारा कर दिया है। सरकारी वकील मोहन सौसरकर ने बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट में चार विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट में बताया गया कि लड़की और उसके परिवार को गर्भपात से जुड़ी संभावित समस्याओं के बारे में समझाया गया, लेकिन उन्होंने फिर भी गर्भपात के लिए मना कर दिया। 
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक दुष्कर्म पीड़िता के गर्भपात में देरी को लेकर दायर याचिका का निपटारा कर दिया है। अदालत ने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि पीड़िता और उसके माता-पिता ने गर्भपात की अनुमति देने से मना कर दिया था।

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सरकारी वकील मोहन सौसरकर ने बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट में चार विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट में बताया गया कि 14 वर्षीय लड़की और उसके परिवार को गर्भपात से जुड़ी संभावित समस्याओं के बारे में समझाया गया, लेकिन उन्होंने फिर भी गर्भपात के लिए मना कर दिया। उनका कहना था कि वे लड़की की भलाई के लिए गर्भावस्था को जारी रखना चाहते हैं।

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अब इस याचिका में किसी और आदेश की जरूरत नहीं
न्यायमूर्ति अमित सेठ ने यह कहते हुए मामले का निपटारा कर दिया, 'चूंकि पीड़िता और उसके माता-पिता गर्भपात नहीं करवाना चाहते और गर्भावस्था को जारी रखना चाहते हैं, इसलिए वे इसके लिए स्वतंत्र हैं। अब इस याचिका में किसी और आदेश की जरूरत नहीं है।'

पांच जून को हाईकोर्ट ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया
5 जून को हाईकोर्ट ने बालाघाट जिले की दुष्कर्म पीड़िता के मामले का स्वत: संज्ञान लिया था, क्योंकि दुष्कर्म पीड़िता सात महीने से ज्यादा गर्भवती थी और गर्भपात में देरी हो रही थी। अदालत ने राज्य सरकार से मामले की विस्तृत जानकारी मांगी थी। यह मामला तब हाईकोर्ट तक पहुंचा जब बालाघाट जिले के जिला न्यायाधीश ने 26 मई को एक पत्र भेजा और साथ में स्थानीय अस्पताल के सिविल सर्जन की रिपोर्ट भी भेजी।
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राज्य सरकार से पूछा- गर्भपात में किस वजह से इतनी देरी हुई 
इससे पहले मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति डी. खोत ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि नाबालिग लड़की के साथ हुए अपराध की रिपोर्ट पुलिस को कब दी गई थी। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि क्या 20 फरवरी को हाईकोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन सही तरीके से किया गया था। इसके बाद कोर्ट ने राज्य सरकार से पूरी जानकारी और केस की डायरी के साथ यह बताने को कहा कि आखिर किस वजह से लड़की के गर्भपात में इतनी देरी हुई।

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