luggage - सांकेतिक तस्वीर (फाइल फोटो)
कोरोना महामारी की वजह से करीब छह महीने से यातायात पर प्रतिबंध के कारण लगेज उद्योग को काफी नुकसान हुआ है। अप्रैल-जून तिमाही में लगेज बिक्री में 90 फीसदी गिरावट आई। अमेरिकन टूरिस्टर, वीआईपी, सैमसोनाइट और सफारी जैसी कंपनियों को छंटनी के साथ 40 फीसदी वेतन कटौती भी करनी पड़ी है। कंपनियां अपनी देनदारी चुकाने के लिए संपत्तियां तक बेच रही हैं।
लॉकडाउन के बाद आधे शोरूम बंद, करनी पड़ी छंटनी और वेतन में कटौती
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सफारी इंडस्ट्रीज की बिक्री महज 20 करोड़ रुपये रही और 19 करोड़ का घाटा लगा। बीते साल कंपनी ने 203 करोड़ की बिक्री की थी। वीआईपी इंडस्ट्रीज भी पहली तिमाही में 40 करोड़ का व्यापार कर सकी और 51 करोड़ का घाटा उठाना पड़ा। 2019 की समान तिमाही में कंपनी की बिक्री 564 करोड़ रुपये थी, जिसमें 35.08 करोड़ का शुद्ध लाभ था।
हालात ये हैं कि कंपनी को अपना कारोबार बचाने के लिए हरिद्वार स्थित फैक्ट्री और जमीन बेचनी पड़ रही है। गिरावट का असर शेयर बाजार पर भी दिख रहा है। 12 फरवरी को वीआईपी के शेयरों का मूल्य 519 रुपये था, जो बुधवार को 290 रुपये प्रति इकाई पर आ गया। सफारी के शेयर भी 7 फरवरी के 682 रुपये गिरकर बुधवार को 372 रुपये पर आ गए।
30 प्रतिशत व्यापार की आशा
सालाना 8,000 करोड़ का कारोबार करने वाले लगेज इंडस्ट्री के अधिकारियों का कहना है कि दूसरी तिमाही में भी हालात ज्यादा बेहतर नहीं हैं। ऐसे में पिछले साल के मुकाबले 30 फीसदी कारोबार होने की ही गुंजाइश है। इस व्यापार में संगठित क्षेत्र की 60 फीसदी भागीदारी है, जिनमें अधिकतर कंपनियों के आधे से अधिक शोरूम हैं। कंपनियां इनका किराया और वेतन का खर्च उठाने की स्थिति में नहीं हैं।