जब हर्षवर्धना से इसके कार्यों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि यह पूरे शरीर के हाव-भाव को ट्रैक करता है और उसके अनुसार कार्य करता है। उन्होंने बताया कि पूरे शरीर की ट्रैकिंग क्लॉथिंग (शरीर पर पहनने वाली ड्रैस) के जरिए की जाती है।
उन्होंने बताया कि पूरी ट्रैकिंग की प्रक्रिया रोबोट के भीतर अपने आप सेव हो जाती है, इस प्रकार हमारे द्वारा किए जा रहे कार्यों को यह रोबोट अंजाम देता है। हर्षवर्धना ने कहा कि यह रोबोट सेना के लिए बहुत उपयोगी साबित होगा।
रोबोट वैज्ञानिक ने बताया कि वर्तमान समय से आतंकी घटनाओं में हमारे बहुत से जवान शहीद होते हैं, लेकिन इस रोबोट के प्रयोग से हम सैनिक को आतंकी अभियान से दूर रखें हुए ही आतंकी को ढेर कर सकते हैं। साथ ही हम रोबोट पर नजर भी रख सकते हैं।
हर्षवर्धना ने बताया कि यह रोबोट 'आर्टिफिशियल जनरल रोबोटिक्स इंटेलिजेंस' के जरिए सभी चीजों को सीखता है और आगे जारी रखता है।
हर्षवर्धना ने बताया कि वर्ल्ड वाइड चैलेंज में उनकी कंपनी '10 मिलियन डॉलर चैलेंज' के सेमीफाइनल में चुने गई है। जहां उनको इस रोबोट को मानव के आकार का बनाना है। उन्होंने बताया कि उनके प्रतिस्पर्धी बर्कले कॉलेज, स्टेनफोर्ड कॉलेज जैसे संस्थान है।
वैज्ञानिक ने जानकारी दी कि इस रोबोट का प्रयोग शिक्षा के क्षेत्र में भी किया जा सकता है। साथ ही यह खेल के क्षेत्र में भी काम आता है। उन्होंने बताया कि पूर्व क्रिकेटर और कोच गैरी कर्स्टन भी इसका प्रयोग करते हैं। भारतीय के क्रिकेट खिलाड़ी युवराज सिंह इसके ब्रैंड एम्बेसडर हैं।
वर्तमान में ये देश कर रहे हैं इसका प्रयोग
हर्षवर्धना ने बताया कि दक्षिण कोरिया, रूस, जापान, इस्राइल, यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका और कनाडा जैसे देश वर्तमान में इस रोबोट का प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस रोबोट को मैसूर से निर्यात किया जा रहा है।
हर्षवर्धना ने कहा कि ये सैनिकों की ट्रेनिंग के लिए बहुत उपयोगी है। वर्तमान समय में सैनिकों की ट्रेनिंग पर बहुत ज्यादा पैसा खर्च होता है, साथ ही समय भी बहुत लगता है। इसके प्रयोग से सैनिकों को ट्रेनिंग दी जा सकती है, जो समय और पैसा दोनों बचाएगा। उन्होंने बताया कि इस रोबोट के माध्यम से सैनिकों को आतंकियों से बंधकों को छुड़ाने की ट्रेनिंग भी दी जा सकती है।
वैज्ञानिक ने बताया कि इसे 'पबजी' गेम की तरह तैयार किया गया है, जिसमें सैनिकों को वर्तमान हालात जैसी स्थितियों की ट्रेनिंग दी जाएगी। यह पूरी तरह गेम ही होगा लेकिन आपको फील्ड में जाने की जरूरत नहीं होगी। उन्होंने बताया कि सैनिकों को गेम मे खेलने को कहा जाएगा और उन्हें युद्ध जैसे हालातों की ट्रेनिंग गेम के माध्यम से दी जाएगी।
हर्षवर्धना ने बताया कि इससे सैनिकों का रेस्पांस टाइम का आकंलन किया जा सकता है। साथ ही इसमें मल्टीप्लेयर का विकल्प भी दिया गया है, जिसकी मदद से कई सैनिकों को एक साथ ट्रेनिंग दी जा सकती है। उन्होंने बताया कि इसमें नौसेना, वायुसेना और थलसेना को एक साथ ट्रेनिंग का विकल्प भी दिया गया है।