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डिफेंस एक्सपो 2020: लखनऊ में दिखा 'आयरन मैन', युद्ध के मैदान में ऐसे बचाएगा सैनिकों की जान

Thu, 06 Feb 2020 07:07 PM IST
अनवर अंसारी शशिधर पाठक, अमर उजाला, लखनऊ
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holosuit robot - फोटो : Amar Ujala
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लखनऊ में आयोजित डिफेंस एक्सपो 2020 में मैसूर से आई एक कंपनी ने ऐसा रोबोट तैयार किया है, जिससे भविष्य में सैनिकों को युद्ध स्थल में भेजने के बजाय उनके द्वारा संचालित रोबोट को भेजकर अभियानों को अंजाम दिया जा सकेगा। 

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इस रोबोट को तैयार करने वाले वैज्ञानिक का नाम हर्षवर्धना किक्कीरी है, जो अमेरिका में माइक्रोसोफ्ट रोबोटिक्स के लिए काम करते थे। लेकिन जब उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्टार्टअप इंडिया के लिए आमंत्रित किया गया तो, वे अमेरिका से वापस लौटकर कर्नाटक के मैसूर आ गए।  
 


हर्षवर्धना ने बताया कि जब वे मैसूर पहुंचे तो उन्होंने यहां 'हॉलोसूट' नाम से एक कंपनी खोली। इस कंपनी को 'कल्याणी ग्रुप' ने मदद प्रदान की। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में वह कल्याण ग्रुप के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। 

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ऐसे काम करता है रोबोट

जब हर्षवर्धना से इसके कार्यों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि यह पूरे शरीर के हाव-भाव को ट्रैक करता है और उसके अनुसार कार्य करता है। उन्होंने बताया कि पूरे शरीर की ट्रैकिंग क्लॉथिंग (शरीर पर पहनने वाली ड्रैस) के जरिए की जाती है। 

उन्होंने बताया कि पूरी ट्रैकिंग की प्रक्रिया रोबोट के भीतर अपने आप सेव हो जाती है, इस प्रकार हमारे द्वारा किए जा रहे कार्यों को यह रोबोट अंजाम देता है। हर्षवर्धना ने कहा कि यह रोबोट सेना के लिए बहुत उपयोगी साबित होगा। 

रोबोट वैज्ञानिक ने बताया कि वर्तमान समय से आतंकी घटनाओं में हमारे बहुत से जवान शहीद होते हैं, लेकिन इस रोबोट के प्रयोग से हम सैनिक को आतंकी अभियान से दूर रखें हुए ही आतंकी को ढेर कर सकते हैं। साथ ही हम रोबोट पर नजर भी रख सकते हैं। 

हर्षवर्धना ने बताया कि यह रोबोट 'आर्टिफिशियल जनरल रोबोटिक्स इंटेलिजेंस' के जरिए सभी चीजों को सीखता है और आगे जारी रखता है। 

युवराज सिंह इसके ब्रैंड एम्बेसडर

हर्षवर्धना ने बताया कि वर्ल्ड वाइड चैलेंज में उनकी कंपनी '10 मिलियन डॉलर चैलेंज' के सेमीफाइनल में चुने गई है। जहां उनको इस रोबोट को मानव के आकार का बनाना है। उन्होंने बताया कि उनके प्रतिस्पर्धी बर्कले कॉलेज, स्टेनफोर्ड कॉलेज जैसे संस्थान है। 

वैज्ञानिक ने जानकारी दी कि इस रोबोट का प्रयोग शिक्षा के क्षेत्र में भी किया जा सकता है। साथ ही यह खेल के क्षेत्र में भी काम आता है। उन्होंने बताया कि पूर्व क्रिकेटर और कोच गैरी कर्स्टन भी इसका प्रयोग करते हैं। भारतीय के क्रिकेट खिलाड़ी युवराज सिंह इसके ब्रैंड एम्बेसडर हैं। 

वर्तमान में ये देश कर रहे हैं इसका प्रयोग
हर्षवर्धना ने बताया कि दक्षिण कोरिया, रूस, जापान, इस्राइल, यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका और कनाडा जैसे देश वर्तमान में इस रोबोट का प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस रोबोट को मैसूर से निर्यात किया जा रहा है। 
 
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सेना के लिए ऐसे होगा उपयोगी

हर्षवर्धना ने कहा कि ये सैनिकों की ट्रेनिंग के लिए बहुत उपयोगी है। वर्तमान समय में सैनिकों की ट्रेनिंग पर बहुत ज्यादा पैसा खर्च होता है, साथ ही समय भी बहुत लगता है। इसके प्रयोग से सैनिकों को ट्रेनिंग दी जा सकती है, जो समय और पैसा दोनों बचाएगा। उन्होंने बताया कि इस रोबोट के माध्यम से सैनिकों को आतंकियों से बंधकों को छुड़ाने की ट्रेनिंग भी दी जा सकती है।

वैज्ञानिक ने बताया कि इसे 'पबजी' गेम की तरह तैयार किया गया है, जिसमें सैनिकों को वर्तमान हालात जैसी स्थितियों की ट्रेनिंग दी जाएगी। यह पूरी तरह गेम ही होगा लेकिन आपको फील्ड में जाने की जरूरत नहीं होगी। उन्होंने बताया कि सैनिकों को गेम मे खेलने को कहा जाएगा और उन्हें युद्ध जैसे हालातों की ट्रेनिंग गेम के माध्यम से दी जाएगी। 

हर्षवर्धना ने बताया कि इससे सैनिकों का रेस्पांस टाइम का आकंलन किया जा सकता है। साथ ही इसमें मल्टीप्लेयर का विकल्प भी दिया गया है, जिसकी मदद से कई सैनिकों को एक साथ ट्रेनिंग दी जा सकती है। उन्होंने बताया कि इसमें नौसेना, वायुसेना और थलसेना को एक साथ ट्रेनिंग का विकल्प भी दिया गया है।  
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