देश में भूंकप की सटीक निगरानी के लिए पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने भूकंप के लिहाज से संवेदनशील इलाकों की निगरानी को बढ़ाने का फैसला किया है। इसके तहत देश भर में 35 और निगरानी केंद्र खोले जाएंगे। दस महीने के भीतर यह केंद्र पूरी क्षमता से काम करने लगेंगे।
इन केंद्रों के खुल जाने से राष्ट्रीय भूंकप निगरानी केंद्र( नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ) रियल टाइम डाटा एकत्र कर सकेंगे। अभी तक राष्ट्रीय भूकंप निगरानी केंद्र देश में भर में रिक्टर स्केल पर 3.5 परिमाण के भूकंप और दिल्ली और आसपास के लिए 2.5 परिमाण के भूकंप दर्ज करता है।
नए निगरानी केंद्रों के आने से और सूक्ष्मता से पृथ्वी के पेट की हलचल का अध्ययन हो सकेगा। नए निगरानी सिस्टc की मदद से कम तीव्रता वाले भूकंप भी मापे जा सकेंगे। इतना ही नहीं देश भर के इलाकों का भूकंप आने की संवेदनशीलता के अनुसार उसकी भूगर्भीय स्थितियों का आकलन किया जा सकेगा ।
नए खुलने वाले केंद्रों में सबसे अधिक जोर समुद्र के तटीय इलाकों के साथ पिछले दशक में भूकंप की मार झेलने वाले इलाकों को प्राथमिकता दी गई है।
इसलिए नए खुलने वाले केंद्रों में सबसे अधिक पांच केंद्र कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और राजस्थान सरीखे राज्यों में चार-चार स्टेशन, उत्तराखंड में तीन, गुजरात और केरल में दो-दो, अरुणाचल, छत्तीसगढ़, हरियाणा, मिजोरम, उड़ीसा, पंजाब में एक-एक निगरानी केंद्र खोला जाएगा।
भारत में भूंकप निगरानी केंद्र खोलने की परंपरा अंग्रेजी शासन काल में शुरू हुई थी। इसमें पहला निगरानी केंद्र 1897 में शिलांग में भूंकप के बाद 1898 में कोलकाता में खुला था। इसके बाद भूकंपों के बाद केंद्रों की संख्या धीरे धीरे बढ़ती गई।
लेकिन इसके बावजूद 2016 तक देश में 82 केंद्र ही थे, जिनकी संख्या अभी 115 है जो अब 160 हो जाएगी। भविष्य में इसमें 200 और निगरानी केंद्र खोलने की योजना है, इसमें हिमालय क्षेत्र में गोलाकार आकार में निगरानी केंद्रों को लेह-लद्दाख से लेकर अरुणाचल तक विस्तार देने की योजना है, जिसका आगाज अरुणाचल और मिजोरम में नए निगरानी केंद्रों के खोलने से हो गया है।
केंद्र सरकार ने भूंकप जैसी प्राकृतिक आपदा पर विस्तार के साथ शोध और विश्व स्तर पर दिन प्रति दिन की स्थितियोँ के विस्तृत आकलन की प्रक्त्रिस्या 2014-15 से गहन अध्ययन के साथ शुरू की। इसके लिए 2017-18 में पूरे भूकंप मापन प्रणाली को डिजिटल किया गया। इसमें पुराने 38 निगरानी केंद्रों को भी नए सिस्टम से लैस किया गया है। 40 नए केंद्र लगाए गए।
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी में भूकंप निगरानी के प्रमुख जे एल गौतम ने कहा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की इस शाखा का कार्य देश में भर में जमीन के भीतर की हलचल को मॉनिटर करना और उसमें आ रहे बदलावों का गहनता से अध्ययन करना है, क्योंकि भूकंप की भविष्यवाणी नहीं जा सकती, लेकिन पृथ्वी की हलचल का अध्ययन हालात के आकलन के लिए जरूरी है।
दिल्ली में पिछले दो साल से लगातार झटके लग रहे हैं, इसका यह अर्थ नहीं है कि यह पता लग जाए कि बड़ा झटका कब लगेगा, लेकिन इस संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि दिल्ली और आसपास के इलाकों में कभी भी बड़ा भूकंप आ सकता है।
उन्होंने कहा साल के अंत तक 160 भूकंप निगरानी केंद्र हो जाने का फायदा यह मिलेगा की अब देश में भी छोटे भूकंपों को मापा जा सकेगा, इनकी मदद से पृथ्वी के भीतर हो रहे भूगर्भीय बदलावों का आसानी से अध्ययन किया जा सकेगा।