धनशोधन मामले में सजा की दर पर टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत, दीपांकर दत्ता और उज्जल भुइयां की तीन जजों की पीठ ने संसद में दिए गए एक बयान का हवाला देते हुए कहा कि ईडी को सजा की दर बढ़ाने के लिए कुछ वैज्ञानिक जांच करनी चाहिए। बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मंगलवार को लोकसभा को सूचित किया कि प्रवर्तन निदेशालय ने साल 2014 से 2024 के बीच धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत कुल 5,297 मामले दर्ज किए, जबकि 40 मामलों में दोषसिद्धि हासिल की गई।
केस को अदालत में साबित करने की जरूरत है- सुप्रीम कोर्ट
दरअसल शीर्ष अदालत छत्तीसगढ़ के एक व्यवसायी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसे कोयला परिवहन पर अवैध लेवी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया था। इस पर पीठ ने ईडी से कहा कि- आपको अभियोजन पक्ष और साक्ष्य की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। पीठ ने कहा कि - सभी मामले जहां आप संतुष्ट हैं कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है, आपको उन मामलों को अदालत में साबित करने की आवश्यकता है। इस मामले में, आप कुछ गवाहों की तरफ दिए गए बयानों, हलफनामों पर जोर दे रहे हैं। इस तरह के मौखिक साक्ष्य... इस तरह के मौखिक साक्ष्य, कल, भगवान ही जानता है कि वह व्यक्ति इसके साथ खड़ा होगा या नहीं।
आपको कुछ वैज्ञानिक जांच करनी चाहिए- सुप्रीम कोर्ट
वहीं पीठ ने ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू से कहा, आपको कुछ वैज्ञानिक जांच करनी चाहिए। इस पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने दलील दी कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 161 के विपरीत, धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 50 के तहत बयानों को साक्ष्य माना जाता है।
इस मौके पर, न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा कि पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तार करने वाले अधिकारी को आरोपी को विश्वास करने के कारण बताने की आवश्यकता होती है और एएसजी से पूछा कि क्या उन्हें लगता है कि वर्तमान मामले में गिरफ्तारी का आदेश कायम रह सकता है।
जबकि याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के मामले में शीर्ष अदालत ने माना है कि गिरफ्तारी के आधार के अलावा, आरोपी को विश्वास करने के कारण भी बताए जाने चाहिए। रोहतगी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, गिरफ्तारी की आवश्यकता भी होनी चाहिए। शीर्ष अदालत की पीठ, जिसने पहले सुनील कुमार अग्रवाल को अंतरिम जमानत दी थी, ने अपने पहले के आदेश को पूर्ण बना दिया।