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हनुमान के जन्मस्थान पर घमासान: आंध्र प्रदेश या कर्नाटक...कहां पैदा हुए पवनपुत्र? जानें क्यों छिड़ गया है विवाद

Tue, 13 Apr 2021 11:16 AM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क अमर उजाला, बंगलुरु

सार

भगवान श्रीराम की जन्मभूमि का विवाद सुलझ ही पाया था कि अब रामभक्त हनुमान के जन्मस्थान को लेकर घमासान शुरू हो गया है। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश दोनों राज्य भगवान हनुमान की जन्मस्थली पर दावा ठोकते रहे हैं।
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hanuman - फोटो : social media
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विस्तार
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भगवान श्रीराम की जन्मभूमि का विवाद सुलझ ही पाया था कि अब रामभक्त हनुमान के जन्मस्थान को लेकर घमासान शुरू हो गया है। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश दोनों राज्य भगवान हनुमान की जन्मस्थली पर दावा ठोकते रहे हैं। अब कर्नाटक के शिवमोगा के एक धर्मगुरु ने मारुतिनंदन के जन्म स्थान पर नया दावा ठोका है। उनका कहना है कि उत्तर कन्नड़ जिले के तीर्थस्थल गोकर्ण में रामदूत हनुमान का जन्म हुआ था। वहीं तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) ने दावा किया है कि तिरुमला पहाड़ियों पर भगवान हनुमान का निवास स्थान है। इसके बाद धार्मिक और पुरातात्विक हलकों में विवाद शुरू हो गया है।

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कर्नाटक के लोग बेल्लारी के पास हंपी को सदियों से किष्किंधा क्षेत्र या वानरों का प्रदेश मानते आए हैं। कर्नाटक के शिवमोगा स्थित रामचंद्रपुर मठ के प्रमुख राघवेश्वर भारती अपने दावे के समर्थन में रामायण का जिक्र करते हैं। इसमें हनुमान सीता से समुद्र के पार गोकर्ण में अपना जन्म स्थान होने की बात कहते हैं। राघवेश्वर भारती का कहना है, ''रामायण में मिले प्रमाण से हम कह सकते हैं कि गोकर्ण हनुमान की जन्मभूमि है और किष्किंधा स्थित अंजनाद्रि उनकी कर्मभूमि है।''

आंध्र प्रदेश ने यहां बताई बजरंगी की जन्मस्थली
आंध्र प्रदेश भी हनुमान की जन्मस्थली पर दावा करता आ रहा है। आंध्र के दावे के मुताबिक, हनुमान की जन्मभूमि तिरुपति की सात पहाड़ियों में से एक पर है। इस पहाड़ी का नाम भी अंजनाद्रि है। बता दें कि तिरुपति में स्थित तिरुमला मंदिर हिंदुओं की मान्यता का बड़ा केंद्र है। तेलुगू में तिरुमला का अर्थ होता है सात पहाड़ियां। यह मंदिर इन्हीं सात पहाड़ियों को पार करने पर आता है।
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टीटीडी ने गत शनिवार को घोषणा की थी कि भगवान हनुमान का जन्म तिरुमला की सात पवित्र पहाड़ियों में से एक में हुआ था। इसे साबित करने के लिए एक पुस्तक का विमोचन 13 अप्रैल को हिंदू नववर्ष, उगाडी पर किया जाएगा। तिरुमला पहाड़ियों पर श्री वेंकटेश्वर मंदिर है। कुछ पुरातत्वविदों और इतिहासकारों ने टीटीडी के दावे को खारिज कर दिया है।

किष्किंधा पर इतिहासकार एकमत

कुछ इतिहासकारों की राय है कि हंपी या विजयनगर राजवंश की पूर्ववर्ती राजधानी के आसपास का क्षेत्र किष्किंधा क्षेत्र है। उनका दावा है कि हंपी में पुरा-ऐतिहासिक काल की अनेक शिला कलाकृतियों में पूंछ वाले लोगों को चित्रित किया गया है। संगमकल्लू, बेलाकल्लू के पास अनेक गुफा कृतियों में मनुष्य के साथ पूंछ जैसी आकृति देखी जा सकती है। इतिहासकारों की ओर से यह दलील दी जा रही है कि वानर मनुष्य जाति की ही एक प्रजाति है, जिसकी पूंछ होती है। बेंगलुरु स्थित चित्रकला परिषद में कला इतिहास विभाग के प्रमुख और प्रोफेसर डॉ. राघवेंद्र राव कुलकर्णी के अनुसार संभवत: त्रेता युग और भगवान राम के समय इन्हीं लोगों ने उनकी मदद की होगी।

विवाद सुलझाने को कलाकृतियों को बनाया आधार
धारवाड़ विश्वविद्यालय में प्राचीन भारतीय इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर ए सुंदर ने बेल्लारी क्षेत्र में अनेक ऐसी पेंटिंग चिह्नित की हैं, जिनमें मनुष्य के पीछे की तरफ एक छोटा सा बाहरी हिस्सा दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि हंपी में और उसके आसपास 1,000 से अधिक हनुमान मंदिर हैं। उन्होंने कहा कि हनुमान जी से जुड़ी कृतियां हंपी क्षेत्र में ही क्यों हैं और तिरुमला में क्यों नहीं हैं?
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पुरातत्वविद भी किष्किंधा पर टिका

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के सेवानिवृत्त अधीक्षण पुरातत्वविद टीएम केशव ने कहा कि उन्होंने रामायण में वर्णित किष्किंधा के सभी भौगोलिक क्षेत्रों को चिह्नित किया है। केशव ने कहा कि सभी रिकॉर्ड, उपलब्ध साक्ष्य, मौजूदा परंपराएं तथा लोक श्रुतियां दर्शाती हैं कि पूर्ववर्ती विजयनगर राज्य, जिसे पहले पंपा क्षेत्र कहा जाता था, को किष्किंधा के रूप में पहचाना गया है, जहां सैकड़ों हनुमान मंदिर हैं।

किसके दावे में दम रिपोर्ट आने पर पता चलेगा
अब सवाल उठता है कि कोप्पल का गोकर्ण, उत्तर कन्नड़ का गोकर्ण या फिर तिरुपति की अंजानाद्रि पहाड़ी आखिर कहां हनुमान का जन्म हुआ था? इस विवाद को सुलझाने के लिए तिरुमला तिरुपति देवस्थानम के विशेषज्ञों का एक पैनल बनाया गया है। इस पैनल में वैदिक जानकार, पुरातत्व विशेषज्ञों के साथ ही इसरो के वैज्ञानिक भी शामिल हैं। 21 अप्रैल को ये एक्सपर्ट्स पैनल अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।
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