सदन की बैठक शुरू होने पर खरगे ने आसन की अनुमति से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, मेरे पिता चाहते थे कि 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक उनके बेटे का नाम हो। घनश्याम तिवाड़ी को मेरे नाम से क्या दिक्कत है। उन्होंने कहा कि मेरा पूरा परिवार राजनीति में था। उन्होंने ‘परिवारवाद’ के बारे में टिप्पणी की।
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे काफी भावुक हो गए। भाजपा सांसद घनश्याम तिवाड़ी की टिप्पणी का जिक्र कर उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में और जीना नहीं चाहता हूं। साथ ही उन्होंने सभापति से तिवाड़ी की उनके राजनीतिक सफर के बारे में सदन में की गई कुछ टिप्पणियों को सदन से हटाने की अपील की। सभापति जगदीप धनखड़ ने आश्वासन दिया कि वह तिवाड़ी की टिप्पणियों को देखेंगे और खरगे को ठेस पहुंचाने वाला कोई भी शब्द रिकॉर्ड में नहीं रहेगा।
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सदन की बैठक शुरू होने पर खरगे ने आसन की अनुमति से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, मेरे पिता चाहते थे कि 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक उनके बेटे का नाम हो। घनश्याम तिवाड़ी को मेरे नाम से क्या दिक्कत है। उन्होंने कहा कि मेरा पूरा परिवार राजनीति में था। उन्होंने ‘परिवारवाद’ के बारे में टिप्पणी की। अभी मैं कह सकता हूं कि वास्तव में परिवारवाद कहां है। खरगे ने कहा, मैं अनुरोध करता हूं कि इस टिप्पणी को (रिकॉर्ड से) हटा दिया जाए। मैं अपने परिवार में राजनीति में आने वाला पहला सदस्य हूं। यदि मैं सदन में निकालने लग जाऊं तो पता चल जाएगा कि यहां कितने परिवारवाद के उदाहरण हैं।
धनखड़ ने की खरगे के लंबे जीवन की कामना
पिता को याद करते हुए खरगे का गला भर आया। उन्होंने कहा, मां के बाद पिता ने ही मेरा पालन-पोषण किया। मैं आज जो भी हूं, वह पिता के आशीर्वाद से ही हूं। खरगे ने कहा कि कुछ ही साल पूर्व 85 साल की उम्र में उनका निधन हुआ है। इस पर सभापति धनखड़ ने कहा कि हम दुआ करेंगे आप 95 साल से ज्यादा जीवित रहें। खरगे ने इस पर कहा, मैं इस माहौल में लंबे समय तक नहीं जीना चाहता। धनखड़ ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि तिवाड़ी का खरगे के लिए कुछ गलत अर्थ था। उन्होंने खरगे को आश्वासन दिया कि वह रिकॉर्ड की बारीकी से जांच करेंगे।