लंबे समय से चल रही अलग गोरखालैंड की मांग करने वाले गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के प्रमुख बिमल गुरुंग के खिलाफ श्चिम बंगाल पुलिस ने लुक आउट नोटिस जारी किया है। बता दें कि दार्जिलिंग बंद के बीच पश्चिम बंगाल पुलिस के एडीजी (लॉ एंड ऑडर) अनुज शर्मा ने कहा, 'भगोड़ा जीजेएम प्रमुख बिमल गुरुंग के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया गया है।'
Lookout notice issued against 'absconding' #GJM supremo #BimalGurung by West Bengal police: ADG (law & order) Anuj Sharma
— Press Trust of India (@PTI_News) September 1, 2017
वहीं जीजेएम के महासचिव रोशन गिरि ने बताया कि पार्टी लाइन के उल्लंघन के कारण विनय तमांग और अनित थापा को निष्कासित कर दिया गया है।
#BinayTamang and #AnitThapa expelled from GJM for violating party line: #GJM general secretary #RoshanGiri
— Press Trust of India (@PTI_News) September 1, 2017
गौरतलब है की बिमल गुरुंग के ऐलान के बाद से दार्जिलिंग में करीब दो महीने से अनिश्चिकालीन बंद है। जीजेएम पश्चिम बंगाल से अलग गोरखालैंड बनाने की मांग कर रहा है। तकरीबन ढाई महीने से जारी विरोध प्रदर्शन के हिंसक होने से कई लोगों की जान जा चुकी है। दार्जिलिंग में लगातार हो रहे प्रदर्शन की वजह से भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
मालूम हो कि 19 अगस्त को पश्चिम बंगाल पुलिस ने दार्जिलिंग में हुए एक बम विस्फोट के मामले में विमल गुरुंग के खिलाफ मामला दर्ज किया था। उनके खिलाफ गैर-कानूनी गतिविधियां के तहत मामला दर्ज किया गया था।
बेनतीजा रही दार्जिलिंग मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक
दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में बीते लगभग ढाई महीनों से चल रहे आंदोलन और बेमियादी बंद के मुद्दे पर राज्य सरकार और पर्वतीय क्षेत्र के तमाम संगठनों के बीच आयोजित सर्वदलीय बैठक बेनतीजा ही रही। हालांकि, अब अगली बैठक 12 सितंबर को दार्जिलिंग जिले के सिलीगुड़ी में होगी।
यहां राज्य सचिवालय में शाम को घंटे भर चली बैठक के बाद ममता ने पत्रकारों से कहा कि पर्वतीय क्षेत्र के तमाम राजनीतिक दलों ने अलग गोरखालैंड के गठन की मांग उठाई थी।लेकिन ममता ने यह कहते हुए इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं की कि गोरखालैंड देना सरकार के वश में नहीं है।
वैसे, उन्होंने इस बैठक को सकारात्मक करार दिया और कहा कि कम से कम इस मुद्दे पर बातचीत की प्रक्रिया तो शुरू हुई है। दूसरी ओर, गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के नेता विनय तामंग ने बताया कि गोरखालैंड की मांग एक सदी से भी ज्यादा पुरानी है। हमने बैठक में यह मांग उठाई थी। इस पर सरकार ने भी अपना रुख साफ कर दिया है।