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आलोचना या सराहना?: तस्लीमा नसरीन ने सीजेपी के प्रदर्शन की बांग्लादेश के आंदोलन से की तुलना, बयान पर सफाई भी दी

Sun, 02 Aug 2026 10:10 PM IST
Pavan एएनआई, कोलकाता

सार

बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन ने दिल्ली में सीजेपी के छात्र आंदोलन को बांग्लादेश के 2024 के छात्र आंदोलन जैसा बताया। उनका दावा है कि बांग्लादेश के आंदोलन के पीछे कट्टरपंथी तत्व थे। वहीं, दिल्ली सरकार ने छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई न करने का फैसला लिया है, हालांकि आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को यह राहत नहीं मिलेगी।
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तस्लीमा नसरीन, बांग्लादेशी लेखिका - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका और मानवाधिकार कार्यकर्ता तस्लीमा नसरीन ने दिल्ली में हुए कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के छात्र आंदोलन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन की तस्वीरें देखकर उन्हें बांग्लादेश के 2024 के छात्र आंदोलन की याद आ गई। उनका दावा है कि बांग्लादेश के उस आंदोलन के पीछे कट्टरपंथी तत्व (जिहादी) सक्रिय थे। कोलकाता में रविवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तस्लीमा नसरीन ने कहा कि उन्होंने सीजेपी के प्रदर्शन की एक छोटी वीडियो क्लिप देखी। उसे देखकर उन्हें बांग्लादेश के छात्र आंदोलन की याद आई, जिसके बारे में उनका कहना है कि बाद में पता चला कि उसके पीछे जिहादी ताकतें थीं।
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पहले भी कर चुकी हैं ऐसी टिप्पणी
तस्लीमा नसरीन इससे पहले 24 जुलाई को भी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन की तुलना बांग्लादेश के जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन से कर चुकी हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया था कि वह दोनों आंदोलनों को एक जैसा नहीं बता रहीं, बल्कि केवल यह कह रही हैं कि दिल्ली के आंदोलन की तस्वीरों ने उन्हें बांग्लादेश की घटनाओं की याद दिलाई। उनके अनुसार, बांग्लादेश के आंदोलन का परिणाम बेहद खराब रहा था।
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दिल्ली सरकार ने प्रदर्शनकारियों को दी राहत
इस बीच, दिल्ली सरकार के गृह विभाग ने 29 जुलाई को आदेश जारी कर कहा था कि हाल के छात्र प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ कोई प्रतिकूल कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। यदि किसी प्रदर्शनकारी को गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया है तो उसके मामलों की जल्द समीक्षा कर रिहाई की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। हालांकि सरकार ने यह भी साफ किया कि जिन लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड है, उन्हें इस राहत का लाभ नहीं मिलेगा। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार लिया गया है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 29 जुलाई की शाम छह बजे तक इन प्रदर्शनों से जुड़े कुल 13 एफआईआर दर्ज की गई थीं।

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37 दिन तक चला था आंदोलन
कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर-मंतर पर 37 दिनों तक आंदोलन चलाया था। इस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने नीट-यूजी पेपर लीक मामले को लेकर 26 दिनों तक भूख हड़ताल की थी। आंदोलन के बाद सरकार ने कई मांगें स्वीकार कीं। इनमें तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को उचित मुआवजा और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने पर सहमति शामिल थी।
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