चीन, अमेरिका सहित कई देशों में कोरोना वायरस महामारी की नई लहर ने दुनिया भर की चिंता बढ़ा दी है। भारत के भी कई राज्यों में कोरोना के नए वैरिएंट का संक्रमण दिखाई देने लगा है। कोरोना से ठीक हो चुके लोग अभी भी लॉन्ग कोविड (Long Covid) के खतरे से जूझ रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस संबंध में संज्ञान लिया हैं। देश-विदेश में हो रहे कई अध्ययनों में पाया गया है कि कोरोना वायरस से संक्रमित होने वाले 10-20 फीसदी आबादी में यह स्थिति विकसित हो सकती है।
इन दिनों सोशल मीडिया में यूट्यूबर डियाना काउअर्न का ट्वीट बहुत चर्चा में बना हुआ है। 11 जनवरी 2023 को डियाना ने ट्वीट कर लॉन्ग कोविड के खतरे के बारे में अवगत करवाया है, जिसे पढ़कर लोग हैरान परेशान हैं। डियाना ने ट्वीट में कहा, 'छह महीने पहले मुझे कोविड हुआ था। आज भी मैं खड़े होकर नहा नहीं सकती। वीडियो कॉल नहीं कर सकती। किताबें नहीं पढ़ सकती। गाड़ी नहीं चला सकती। लेकिन मैं फिर भी ठीक होने की लड़ाई लड़ रही हूं।'
डियाना के ट्वीट को करीब साढ़े 48 हजार लोग लाइक कर चुके हैं और इसे साढ़े तीन हजार से ज्यादा लोगों ने रीट्वीट किया है। डियाना साइंस कम्युनिकेटर हैं, और वह फिजिक्स गर्ल के नाम से यूट्यूब चैनल चलाती हैं, जो उन्होंने 2011 में शुरू किया था। इस चैनल में वह प्रयोग और खोज से फिजिक्स समझाती हैं। कोरोना संक्रमित होने के बाद से ही डियाना सोशल मीडिया के जरिए लोगों को जागरूक करने और सतर्कता बरतने की जानकारी साझा करती हुई नजर आ रही हैं। डियाना की कहानी सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद कई लोग अपनी आपबीती भी शेयर करते हुए नजर आ रहे हैं। एक ट्विटर यूजर ने लिखा है, मुझे पूरी तरह से ठीक होने में दो साल का समय लग गया। पहला साल सबसे मुश्किल था।
अमर उजाला से चर्चा में स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 संक्रमण से रिकवरी के बाद भी कुछ लोगों में लंबे समय तक कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं देखी जा रही हैं, इसे लॉन्ग या पोस्ट कोविड सिंड्रोम के तौर पर जाना जाता है। विशेषतौर पर कोरोना के डेल्टा वैरिएंट से संक्रमण के बाद लॉन्ग कोविड के मामले अधिक देखे गए थे, जिसमें संक्रमण से ठीक होने के एक साल बाद तक लोगों में थकान-कमजोरी, सांस की समस्या आदि बनी हुई थी। डेल्टा वैरिएंट अधिक गंभीर रोगों का कारण बन रहा था, इसकी तुलना में ओमिक्रॉन से संक्रमण में गंभीरता को जोखिम काफी कम है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ओमिक्रॉन संक्रमण वाले व्यक्तियों में भी डेल्टा संक्रमितों की तरह ही लॉन्ग कोविड का जोखिम हो सकता है। पोस्ट कोविड की समस्याओं में थकान, सांस की तकलीफ, खांसी, चिंता, अवसाद और दिल की धड़कन की अनियमितता शामिल हैं। लॉन्ग कोविड की समस्याओं का जोखिम 14 दिन से लेकर 126 दिन तक हो सकता है। इसके अलावा जिन लोगों ने कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज ले ली हैं, उनमें अन्य लोगों की तुलना में पोस्ट कोविड समस्याओं का जोखिम कम पाया गया है। वहीं बूस्टर डोज वालों में जोखिम और कम हो जाता है।