वहीं टीडीपी नेता वाईएस चौधरी ने कहा कि सरकार दोनों सदनों में कोई भी कार्यवाही नहीं होने दे रही है। उन्होंने कहा कि यह सब सरकार की प्लानिंग है। सरकार ऐसा करके आम पब्लिक का पैसा बेकार कर रही है।
उन्होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव हो या बैंकिंग संबंधी मामले सरकार सभी पर बात करने के लिए तैयार हैं। बता दें कि अन्नाद्रमुक और टीआरएस के हंगामे के चलते संसद की कार्यवाही बुधवार को भी बाधित रही थी। आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना के सांसदों के शोरशराबे के चलते लोकसभा की कार्रवाई पहले दोपहर तक और इसके बाद दिन भर के लिए स्थगित करनी पड़ी।
राज्यसभा में सभापति एम वेंकैया नायडू ने सदन की कार्यवाही बुधवार को भी चार मिनट बाद ही स्थगित कर दी थी। इससे पहले सदन की कार्यवाही शुरू होते ही आंध्र को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग के साथ सभी दलों के सांसद और कांग्रेस के केवीपी रामचंद्र राव नारेबाजी करते हुए वेल में आ गए थे। वहीं सदन में वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद एससी/एसटी के साथ हो रही घटनाओं और इराक में 39 भारतीयों की हत्या को लेकर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के बयान पर चर्चा कराने की मांग रखी।
इस पर सभापति ने कहा था कि आपको पहले नोटिस देना होगा। नायडू ने हंगामा कर रहे सांसदों से कहा कि क्या वे चाहते हैं कि हंगामा करते उनके चेहरे देश देखे। इसके बाद उन्होंने कार्यवाही स्थगित कर दी थी। सभापति ने कार्यवाही शुरू होने के कुछ देर बाद सीधे दिन भर के लिए स्थगित कर दी। उधर, लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही आंध्र के दलों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था।
स्पीकर ने कार्यवाही दोपहर तक के लिए स्थगित कर दी। इसके बाद दोपहर में अन्नाद्रमुक, टीडीपी और टीआरएस के सांसद वेल में पोस्टर लेकर हंगामा करने लगे। सदन के पटल पर दस्तावेज रखने के बाद संसदीय कार्यमंत्री ने सदस्यों से अपनी सीट पर चले जाने की अपील की ताकि विधायी कार्य निपटाया जा सके।
उन्होंने कहा, सरकार अविश्वास प्रस्ताव समेत सभी मुद्दों पर चर्चा को तैयार है। जब स्पीकर ने टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस की ओर से दिए गए अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस को लेना चाहा, अन्नाद्रमुक ने हंगामा तेज कर दिया। टीआरएस के सदस्य भी वेल में देखे गए। इसके बाद, स्पीकर ने सदन में व्यवस्था न होने का सवाल उठाते हुए अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर आगे कार्यवाही शुरू करने में असमर्थता जता दी।