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केरलम में प्रवासियों को झटका: लोका केरल सभा खत्म, बीमा महंगा और पेंशन पर भी संकट, मुख्यमंत्री ने क्या कहा?

Thu, 29 Oct 2026 01:32 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, तिरुवनंतपुरम

सार

केरलम सरकार ने लोका केरल सभा को भंग करने का फैसला लिया है, जबकि विपक्ष ने इसे प्रवासियों के साथ अन्याय बताते हुए बीमा प्रीमियम में बढ़ोतरी और पेंशन में देरी पर सवाल उठाए हैं।
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मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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केरलम में प्रवासियों की समस्याएं उठाने के लिए बनाई गई ‘लोका केरल सभा’ को भंग कर दिया गया है। मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने गुरुवार को विधानसभा में इसकी जानकारी देते हुए कहा कि यह संस्था अपने मकसद को पूरा नहीं कर पा रही थी। वहीं, विपक्षी दलों ने इस फैसले को प्रवासी समुदाय के साथ अन्याय बताते हुए सरकार पर निशाना साधा है।

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क्यों खत्म की गई लोका केरल सभा?
मुख्यमंत्री सतीशन ने कहा कि यूडीएफ लंबे समय से इस व्यवस्था का विरोध करती रही है। उनका कहना है कि सभा में रखे गए सुझावों पर जरूरी कार्रवाई नहीं हो रही थी। इसलिए इसे खत्म कर प्रवासियों की समस्याएं सुनने और उनका समाधान करने के लिए एक ज्यादा मजबूत व्यवस्था बनाई जाएगी। हालांकि, विपक्ष का कहना है कि सरकार ने अभी तक इसका कोई विकल्प नहीं दिया है।

पेंशन के लिए हर महीने 35 करोड़ की जरूरत
विधानसभा में LDF ने प्रवासियों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग की। इनमें कल्याण बोर्ड की पेंशन में देरी, बीमा प्रीमियम में बढ़ोतरी और खाड़ी देशों से केरल आने-जाने के महंगे हवाई किराए शामिल थे। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रवासी कल्याण बोर्ड के पास करीब 700 करोड़ रुपये की कमी है। पेंशन का भुगतान करने के लिए सरकार को अपने स्तर पर पैसा देना पड़ रहा है। बोर्ड को हर महीने करीब 35 करोड़ रुपये पेंशन बांटने के लिए चाहिए, जबकि योगदान से सिर्फ 16 करोड़ रुपये ही मिल रहे हैं।
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तीन महीने की पेंशन का पैसा सरकार ने दिया
सतीशन के मुताबिक, सरकार ने तीन महीने की पेंशन देने के लिए 32 करोड़ रुपये की कमी पूरी की है। इसके बावजूद तीन महीने की पेंशन का भुगतान अभी बाकी है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 में बोर्ड ने 163 करोड़ रुपये के लाभ और 102 करोड़ रुपये की पेंशन का भुगतान किया। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 2020-21 में बोर्ड के सदस्यों की संख्या करीब 17 हजार थी, जो अब बढ़कर एक लाख से ज्यादा हो गई है। लेकिन योगदान की रकम उसी हिसाब से नहीं बढ़ी। उन्होंने प्रवासियों और उनके संगठनों से बोर्ड में नियमित योगदान देने की अपील की।

बीमा प्रीमियम बढ़ने की क्या है वजह?
बीमा प्रीमियम में बढ़ोतरी पर सतीशन ने कहा कि योजना बनाते समय पहले से मौजूद बीमारियों को भी कवर करने का फैसला किया गया था। इससे इलाज के लिए बड़ी संख्या में दावे आए और बीमा कंपनी पर खर्च का बोझ बढ़ गया। उन्होंने बताया कि NORKA केयर योजना में 145 करोड़ रुपये जमा हुए, जबकि करीब 210 करोड़ रुपये के दावों का भुगतान करना पड़ा। इनमें लगभग 120 करोड़ रुपये कैंसर जैसी बीमारियों के इलाज पर खर्च हुए। ऐसे में पुरानी दरों पर बीमा देने के लिए कोई कंपनी तैयार नहीं हुई। सरकार के मुताबिक, इस योजना में 18 से 110 साल तक के लोगों को बीमा कवर देने का प्रावधान है।

महंगे हवाई किराए पर भी उठाया सवाल
विपक्षी विधायक के. के. वलसराज ने खाड़ी देशों से लौटने वाले प्रवासियों से वसूले जाने वाले भारी हवाई किराए का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण कई लोगों की नौकरियां जा रही हैं। ऐसे में कुछ महीनों तक योगदान न दे पाने पर कल्याण बोर्ड की सदस्यता खत्म हो जाना भी प्रवासियों के लिए परेशानी बढ़ाता है। सतीशन ने भरोसा दिया कि नियमों में बदलाव किया जाएगा, ताकि बकाया राशि जमा कर सदस्यता दोबारा शुरू कराई जा सके। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र से हवाई किराए पर नियंत्रण लगाने की मांग करती रही है।

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विपक्ष का वॉकआउट, सरकार पर लगाए आरोप
सरकार की ओर से स्थगन प्रस्ताव को मंजूरी देने की जरूरत नहीं बताने के बाद स्पीकर तिरुवंचूर राधाकृष्णन ने इसे खारिज कर दिया। इसके विरोध में LDF ने सदन से वॉकआउट किया। विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने लोका केरल सभा खत्म करने को प्रवासियों के साथ क्रूरता बताया। उन्होंने बीमा प्रीमियम में बढ़ोतरी वापस लेने की मांग की। विजयन ने यह भी आरोप लगाया कि UDF सरकार ने NORKA का बजट 154 करोड़ रुपये से घटाकर 112 करोड़ रुपये कर दिया है, जबकि LDF ने 2026-27 के बजट में 154 करोड़ रुपये रखे थे। उनके मुताबिक, प्रवासी राज्य और देश के विकास में बड़ा योगदान देते हैं, लेकिन उनकी समस्याओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है।

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