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Lok Sabha: लोकसभा में डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन विधेयक विचार-विमर्श के लिए लाया जाएगा, कल होना है पारित

Sun, 06 Aug 2023 10:37 PM IST
देव कश्यप एएनआई, नई दिल्ली।

सार

हितधारकों और विभिन्न एजेंसियों की प्रतिक्रिया के मद्देनजर इस विधेयक को अगस्त 2022 में वापस ले लिया गया था। इसके बाद 18 नवंबर, 2022 को सरकार ने डिजिटल व्यक्तिगत डाटा संरक्षण विधेयक- 2022 नामक एक नया मसौदा विधेयक प्रकाशित किया और इस मसौदे पर सार्वजनिक परामर्श शुरू किया।
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संसद भवन (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : PTI
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विस्तार
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लोकसभा में सोमवार को डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) विधेयक, 2023 पर विचार और पारित करने के लिए चर्चा होनी है। इससे पहले तीन अगस्त को केंद्रीय संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में डिजिटल व्यक्तिगत डाटा संरक्षण विधेयक, 2023 पेश किया था। विपक्षी सदस्यों ने विधेयक पेश किए जाने का कड़ा विरोध किया और कहा कि यह विधेयक निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है। उन्होंने मांग की कि विधेयक को जांच के लिए स्थायी समिति के पास भेजा जाना चाहिए।

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उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले साल डाटा संरक्षण पर एक विधेयक वापस ले लिया था और नए विधेयक की समीक्षा करने की ज्यादा जरूरत है। वैष्णव ने कहा कि यह कोई धन विधेयक नहीं है और विपक्ष द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों का जवाब बहस के दौरान दिया जाएगा। यह विधेयक एक तरीके से डिजिटल व्यक्तिगत डाटा के प्रसंस्करण का प्रावधान करता है। यह व्यक्तियों के अपने व्यक्तिगत डाटा की सुरक्षा के अधिकार और वैध उद्देश्यों के लिए ऐसे व्यक्तिगत डाटा को संसाधित करने की आवश्यकता को मान्यता देता है।

हितधारकों और विभिन्न एजेंसियों की प्रतिक्रिया के मद्देनजर इस विधेयक को अगस्त 2022 में वापस ले लिया गया था। इसके बाद 18 नवंबर, 2022 को सरकार ने डिजिटल व्यक्तिगत डाटा संरक्षण विधेयक- 2022 नामक एक नया मसौदा विधेयक प्रकाशित किया और इस मसौदे पर सार्वजनिक परामर्श शुरू किया। इस विषय पर व्यापक एवं विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। जनता से 21,666 टिप्पणियां प्राप्त हुईं और 46 सेक्टर संगठनों, संघों और उद्योग निकायों के साथ परामर्श की एक श्रृंखला आयोजित की गई।
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भारत सरकार के 38 मंत्रालयों या विभागों से भी टिप्पणियां प्राप्त हुईं। डिजिटल व्यक्तिगत डाटा संरक्षण विधेयक-2022 के पुन: प्रस्तुत मसौदे में गैर-कंपनियों से लेकर कंपनियों तक पर छह प्रकार के दंड का प्रस्ताव किया गया है। व्यक्तिगत डाटा उल्लंघन को रोकने के लिए सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए रखे गए मसौदा विधेयक में 250 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव किया जा रहा है। इसके अलावा, व्यक्तिगत डाटा उल्लंघन की स्थिति में बोर्ड और प्रभावित डाटा प्रिंसिपलों को सूचित करने में विफलता और बच्चों के संबंध में अतिरिक्त दायित्वों को पूरा न करने पर 200 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।

अधिनियम की धारा 11 और 16 के तहत महत्वपूर्ण डाटा के लिए जिम्मेदार व्यक्ति द्वारा अतिरिक्त दायित्वों को पूरा न करने पर क्रमशः 150 करोड़ रुपये और 10 करोड़ रुपये का जुर्माना लग सकता है। अंत में इस अधिनियम के (1) से (5) में सूचीबद्ध प्रावधानों के अलावा अन्य प्रावधानों और इसके तहत बनाए गए किसी भी नियम का अनुपालन न करने पर 50 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगेगा। विचार-विमर्श और टिप्पणियों के दौरान उभरे बिंदुओं का गहन अध्ययन किया गया और डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन बिल- 2023 के मसौदे को अंतिम रूप दिया गया।

प्रस्तावित विधेयक का पहला सिद्धांत यह है कि संगठनों द्वारा व्यक्तिगत डाटा का उपयोग वैध, संबंधित व्यक्तियों के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से किया जाना चाहिए। उद्देश्य सीमा का दूसरा सिद्धांत यह है कि व्यक्तिगत डाटा का उपयोग उन उद्देश्यों के लिए किया जाए जिनके लिए इसे एकत्र किया गया था। डाटा न्यूनतमकरण का तीसरा सिद्धांत यह है कि किसी विशिष्ट उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक व्यक्तिगत डाटा से केवल उन्हीं वस्तुओं को एकत्र किया जाना चाहिए जिसकी मांग है।

अन्य बातों के अलावा, व्यक्तिगत डाटा को उस अवधि तक सीमित किया जाना चाहिए जो उस बताए गए उद्देश्य के लिए आवश्यक है जिसके लिए व्यक्तिगत डाटा एकत्र किया गया था और यह सुनिश्चित करने के लिए उचित सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए कि कोई अनधिकृत संग्रह न हो।

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