लोकसभा में स्पीकर की बातों का न माना जाना या सांसदों का उनकी बात ही नहीं सुनना, ऐसे मामले अक्सर देखे-सुने जाते रहे हैं। लेकिन, अब हालात बदल रहे हैं और इस बात का प्रमाण आज लोकसभा में मिला। लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने प्रश्नकाल के दौरान वेल में प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस, टीएमसी और डीएमके सांसदों को फटकार लगाते हुए कहा कि मेरे स्टाफ को हाथ मत लगाना। उन्होंने सांसदों को चेतावनी दी कि किसी भी कर्मचारी को हाथ लगाने की कोशिश भी न करें।
लोकसभा के स्पीकर ओम बिड़ला ने लोकसभा में अपने पहले ही दिन सदन को अपने तेवरों का अहसास करा दिया था। प्रश्नकाल में ज्यादातर सवाल पर दूसरे सदस्यों को पूरक सवाल पूछने का मौका नहीं दिया तो कार्यवाही के दौरान बातचीत करने वाले सांसदों को सख्त लहजे में गैलरी में जाकर बातचीत करने का निर्देश दिया था। स्पीकर ने दो टूक शब्दों में नियम को पंरपरा के ऊपर बताते हुए कहा था कि भविष्य में सदन की कार्यवाही परंपरा से नहीं नियम से चलेगी।
कुछ समय पहले ही शून्यकाल के दौरान एक सांसद द्वारा प्रश्न बदलने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई थी और कहा था कि प्रश्न बदलने के लिए अनुमति लेनी पड़ेगी, मैं पढ़ा लिखा स्पीकर हूं। दरअसल आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान ने अन्य देशों में स्थित भारत के दूतावासों में भारतीयों को होने वाली कठिनाइयों पर बोलना शुरू ही किया था कि स्पीकर बिड़ला ने उन्हें बैठने को कह दिया था। स्पीकर ने कहा, 'यदि आप शून्य काल में विषय बदलना चाहते हैं तो आपको मेरी अनुमति लेनी होगी। आपको पंजाब में शिक्षकों के वेतन से संबंधित विषय दिया गया है। मैं पढ़ा-लिखा स्पीकर हूं।'