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Lok Sabha: स्पीकर ओम बिरला बोले- पीएम के साथ हो सकती थी अप्रत्याशित घटना, मैंने आने से मना किया

Thu, 05 Feb 2026 03:08 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने संसद में सांसदों के अप्रिय व्यवहार की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ अप्रत्याशित घटना हो सकती थी। हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा।

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ओम बिरला, लोकसभा स्पीकर - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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संसद के बजट सत्र के दौरान इन दिनों लोकसभा में लगातार हंगामा देखने को मिल रहा है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब देना था, लेकिन विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के कारण यह संभव नहीं हो सका। हालात बिगड़ते देख सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अब लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन में गंभीर और अहम बयान दिया है।

स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि जिस तरह का माहौल उस दिन लोकसभा में बना, उसमें कोई भी अप्रिय और अप्रत्याशित घटना घट सकती थी। उन्होंने साफ कहा कि ऐसा व्यवहार संसद की गरिमा और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के बिल्कुल विपरीत था।

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विपक्षी व्यवहार को बताया अभूतपूर्व
ओम बिरला ने सदन को बताया कि लोकसभा के इतिहास में पहली बार उन्होंने इस तरह का आचरण देखा है। उन्होंने कहा कि कुछ सदस्यों ने न केवल सदन के भीतर बल्कि अध्यक्ष के कार्यालय में भी जिस प्रकार का व्यवहार किया, वह संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं था। स्पीकर ने इसे संसदीय व्यवस्था पर काला धब्बा बताया और कहा कि अब तक राजनीतिक मतभेदों को कभी भी अध्यक्ष के कार्यालय तक नहीं ले जाया गया। उन्होंने सभी दलों से अपील की कि मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन सदन को सुचारू रूप से चलाने में सभी सांसदों का सहयोग आवश्यक है।

सदन में बने थे असाधारण हालात
बुधवार को लोकसभा में उस समय असामान्य दृश्य देखने को मिले, जब विपक्ष की महिला सांसद प्रधानमंत्री के संभावित भाषण से पहले बैनर लेकर उनके आसन की ओर बढ़ने लगीं। उस वक्त प्रधानमंत्री सदन में मौजूद नहीं थे और भाजपा सांसद पी. पी. चौधरी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर अपनी बात रख रहे थे। हालात बिगड़ते देख सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित करनी पड़ी।
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पीएम की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता
स्पीकर ओम बिरला ने सदन में यह भी खुलासा किया कि जब प्रधानमंत्री को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देना था, तब उन्हें पुख्ता जानकारी मिली थी कि कांग्रेस के कुछ सदस्य प्रधानमंत्री के आसन तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं सदन में ऐसे दृश्य देखे, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई थी। स्पीकर ने कहा कि यदि ऐसा होता तो यह न केवल अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण होता, बल्कि देश की लोकतांत्रिक परंपराओं को भी गहरा आघात पहुंचता। इसी आशंका को देखते हुए उन्होंने एहतियातन प्रधानमंत्री से सदन में न आने का अनुरोध किया।

पीएम ने स्पीकर के आग्रह को माना
ओम बिरला ने बताया कि सदन के नेता होने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके आग्रह को स्वीकार किया और सदन में नहीं आए। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि इससे एक बड़े अप्रिय दृश्य को टालने में मदद मिली और सदन की गरिमा बनी रही। स्पीकर ने दोहराया कि सदन के अध्यक्ष के रूप में उनकी यह संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वे लोकसभा की उच्च परंपराओं और मर्यादा की रक्षा करें।
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हंगामे के बीच बिना पीएम भाषण के पारित हुआ धन्यवाद प्रस्ताव
गुरुवार को बजट सत्र के चौथे दिन भी संसद के दोनों सदनों में टकराव का माहौल बना रहा। लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री के भाषण के बिना ही ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। प्रधानमंत्री सदन में मौजूद थे और बोलने वाले भी थे, लेकिन लगातार व्यवधान के चलते अंततः सत्ता पक्ष ने ध्वनिमत से प्रस्ताव पारित करने का निर्णय लिया। यह 2004 के बाद पहला मौका रहा, जब लोकसभा में प्रधानमंत्री के संबोधन के बिना धन्यवाद प्रस्ताव पारित हुआ।

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