संसद के शीतकालीन सत्र में बुधवार को लोकसभा में जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) की बैठकों में सांसदों को आमंत्रित न किए जाने का मुद्दा उठा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने खुद इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि सांसदों को उनके क्षेत्रों में जिला खनिज फाउंडेशन की बैठकों के लिए आमंत्रित नहीं किया जाता है। इस पर सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि इन बैठकों में सांसदों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किए जाने के कारण नियमों में जरूरी संशोधन किए जाएंगे।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उठाया मुद्दा
दरअसल, लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान जब कोयला, खान और संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी सवालों के जवाब दे रहे थे, तभी अध्यक्ष ओम बिरला ने इस मुद्दे का जिक्र किया। लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने जोशी से पूछा कि डीएमएफ की बैठकों में सांसदों को आमंत्रित नहीं किया जाता। ऐसे में आप इसके लिए नियम कब लाएंगे? उन्होंने आगे कहा कि सदन के अन्य सदस्य भी यही जानना चाहते हैं।
प्रल्हाद जोशी ने दिया ये जवाब
कोयला, खान और संसदीय कार्य मंत्री जोशी ने कहा कि सरकार नियमों में संशोधन करेगी ताकि अनिवार्य रूप से सांसद और विधायक फाउंडेशन की गवर्निंग काउंसिल का हिस्सा हों। उन्होंने कहा कि खनन राज्य का विषय है और डीएमएफ की बैठकों में सांसदों, विधायकों को आमंत्रित करने के संबंध में सलाह जारी की गई थी, लेकिन कई जगहों पर इसका पालन नहीं किया जा रहा है।
क्या है डीएमएफ?
बता दें कि जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) एक गैर-लाभकारी संस्था है। यह खनन संबंधी गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों और क्षेत्रों के लाभ के लिए राज्य सरकार द्वारा निर्धारित तरीके से काम करती है। डीएमएफ के तहत धन एकत्र किया जाता है। इस धन का उपयोग केवल खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम के तहत निर्धारित उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।