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Om Birla: 'संविधान सभा की गरिमापूर्ण, रचनात्मक बहस की परंपराओं का पालन करें', लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अपील

Tue, 26 Nov 2024 01:04 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ओम बिरला ने अपने संबोधन में कहा कि संविधान सभा ने करीब तीन वर्षों तक संविधान बनाने और देश की भौगोलिक और सामाजिक विविधता को साथ लाने के लिए कड़ी मेहनत की। हमारे सदनों को भी संविधान सभा की परंपरा का पालन करना चाहिए और रचनात्मक और गरिमापूर्ण बहस करनी चाहिए। 
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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को संविधान दिवस के अवसर पर सभी संसद सदस्यों से अपील की कि जिस तरह से संविधान सभा में गरिमापूर्ण और रचनात्मक तरीके से बहस हुईं, उस परंपरा का पालन किया जाना चाहिए। देश का संविधान लागू हुए 75 साल पूरे हो गए हैं। इस अवसर पर संसद के सेंट्रल हॉल में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसी दौरान लोकसभा अध्यक्ष ने सभी सदस्यों से रचनात्मक बहस करने की अपील की।
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संविधान, पूर्वजों के समर्पण, बलिदान का प्रमाण
ओम बिरला ने अपने संबोधन में कहा कि संविधान सभा ने करीब तीन वर्षों तक संविधान बनाने और देश की भौगोलिक और सामाजिक विविधता को साथ लाने के लिए कड़ी मेहनत की। हमारे सदनों को भी संविधान सभा की परंपरा का पालन करना चाहिए और रचनात्मक और गरिमापूर्ण बहस करनी चाहिए। ओम बिरला ने कहा, 'इसी दिन, इस पवित्र सदन में, हमारे संविधान को अपनाया गया था, जो हमारे पूर्वजों के समर्पण, बलिदान और दूरदर्शिता का प्रमाण है।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि संसद ने पिछले साढ़े सात दशकों में एक परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, 'हमारा संविधान सामाजिक और आर्थिक बदलाव का उत्प्रेरक रहा है, जिसने आम नागरिकों के जीवन में उल्लेखनीय सुधार किए हैं और लोकतंत्र में उनकी आस्था को गहरा किया है। इस 'अमृत काल' में सामूहिक प्रयास भारत को एक विकसित राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर कर रहे हैं।' 
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संविधान से लोकतंत्र के विभिन्न स्तंभों के बीच स्थापित हुआ संतुलन
बिरला ने विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की शक्तियों के बीच संतुलन बनाने में संविधान की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा, '75 वर्षों से लोकतंत्र के इन तीन स्तंभों ने सामंजस्य के साथ काम किया है और भारत के समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।' उन्होंने संसद सदस्यों से विधायी कार्यवाही में समावेशिता और संवाद को बढ़ावा देने की अपील की। बिरला ने कहा, 'संवैधानिक मूल्यों के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता ने वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति को बढ़ाया है, जो वसुधैव कुटुम्बकम के सिद्धांत का उदाहरण है- दुनिया एक परिवार है।'
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