एक विधायी शोध संस्था 'पीआरएस लेजिस्लेटिव' ने एक रिपोर्ट में बताया इस साल लोकसभा और राज्यसभा ने अपने समय का 30 प्रतिशत से भी कम हिस्सा विधायी कामकाज पर खर्च किया। इसमें बिलों पर चर्चा करना और उन्हें पास करने में लगा समय भी शामिल है। शोध संस्था ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि इस साल प्रश्नकाल तय समय से कम समय तक चला। बता दें कि लोकसभा में प्रश्नकाल सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे तक होता है, वहीं राज्यसभा में यह दोपहर 12 बजे से 1 बजे तक होता है।
2025 में 31 विधेयक हुए पारित
इस साल 2025 में संसद ने कुल 31 विधेयक पारित किए। इनमें भारत में वक्फ संपत्तियों के नियमों में बदलाव करने वाला विधेयक और आयकर कानूनों को सरल बनाने वाला विधेयक शामिल है। इसके अलावा, ऑनलाइन धन वाले खेलों (मनी गेम्स) और संबंधित सेवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया। साथ ही, परमाणु ऊर्जा और बीमा क्षेत्रों को भी खोल दिया गया है।
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मनरेगा में भी हुआ बड़ा बदलाव
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) 2005 में भी संशोधन किया गया। इस योजना के अंतर्गत रोजगार गारंटी को बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। केंद्र और राज्य के बीच राशि का विभाजन 60:40 के अनुपात में होगा, जबकि पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 रहेगा।
संसदीय समितियों की भूमिका
18वीं लोकसभा के कार्यकाल के दौरान संसद में 42 विधेयक पेश किए गए। इनमें से 26 प्रतिशत यानी 11 विधेयकों को विस्तृत जांच के लिए संसदीय समितियों के पास भेजा गया। केवल एक विधेयक को विभाग से संबंधित स्थायी समिति के पास भेजा गया है। जांच के लिए भेजे गए विधेयकों में एक साथ चुनाव कराने पर दो विधेयक और हिरासत में लिए गए मंत्रियों को हटाने से संबंधित तीन विधेयक भी शामिल हैं। संयुक्त समितियां इन विधेयकों के प्रत्येक समूह की एक साथ जांच कर रही हैं।
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