वोटिंग के बाद राज्यसभा में भी तीन तलाक बिल पास। वोटिंग के दौरान विपक्ष के कई सांसद गायब रहे। बिल के पक्ष में 99 और विरोध में 84 वोट पड़े। अब ये बिल कानून का रूप लेगा। अब तीन तलाक देने पर आरोपी को तीन साल की जेल होगी।
विधेयक पर वोटिंग
तीन तलाक बिल को सेलेक्ट कमेटी में भेजे जाने के मुद्दे पर वोटिंग। वोटिंग के लिए पर्ची बांटी गई क्योंकि नए सांसदों को सीट अलॉट नहीं हुई है। 100-84 से गिरा प्रस्ताव। राज्यसभा में बिल पास होने की उम्मीद बढ़ी। सेलेक्ट कमेटी न भेजे जाने के पक्ष में 100 वोट, भेजे जाने के पक्ष में 84 वोट पड़े। अब इस बिल के राज्यसभा में पास होने की उम्मीद बड़ी। वोटिंग के दौरान विपक्ष के कई सांसद नदारद रहे। जेडीयू, अन्नाद्रमुक के अलावा टीआरएस और बसपा भी सदन में मौजूद नहीं थी।
रविशंकर का आजाद पर निशाना
सदन में रविशंकर प्रसाद ने कहा- गुलाम नबी साहब, आपने 1986 में 400 सीटें जीती थीं। उसके बाद देश में नौ चुनाव हुए, आपको कभी भी बहुमत नहीं मिली। सोचिए ऐसा क्यों नहीं हुआ? आप 2014 में 44 पर थे, आज 52 पर हैं।
सपा सांसद का सवाल, मंत्री समूह का क्या हुआ?
सपा सदस्य जावेद अली खान ने सरकार से यह भी जानना चाहा कि महिलाओं के यौन शोषण मुद्दे से निबटने के बारे में चार मंत्रियों का एक समूह बनाया गया था, उसका क्या हुआ? क्या उस मंत्री समूह ने अपनी कोई रिपोर्ट दी है? उन्होंने कहा कि तीन तलाक को प्रतिबंधित करने के मामले में सरकार जार्डन, सीरिया और अफगानिस्तान जैसे देशों की मिसाल दे रही है। उन्होंने कहा कि हमारा देश क्या अब इस स्थिति में पहुंच गया है कि वह इन देशों का अनुकरण करेगा। उन्होंने कहा कि मुस्लिम विवाह एक दिवानी करार है। उन्होंने कहा कि तलाक का मतलब इस करार को समाप्त करना है। उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत तलाक का अपराधीकरण किया जा रहा है, जो उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक कारणों से यह विधेयक लायी है और ऐसा करना उचित नहीं है।
अन्नाद्रमुक ने भी किया विरोध
अन्नाद्रमुक के ए नवनीत कृष्णन ने विधेयक का विरोध करते हुए इसे प्रवर समिति में भेजे जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐसा कानून बनाने की संसद के पास विधायी सक्षमता नहीं है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के कुछ प्रावधानों को पूर्व प्रभाव से लागू किया गया है जो संविधान की दृष्टि से उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम विवाह एक दिवानी समझौता है और इसे भंग करना अपराध नहीं हो सकता है। तीन तलाक के बारे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय का उल्लेख करते हुए अन्नाद्रमुक नेता ने कहा कि जब इस कृत्य को शीर्ष न्यायालय निष्प्रभावी बता चुका है तो उस निष्प्रभावी कृत्य पर संसद कानून कैसे बना सकती है? उन्होंने कहा कि यह विधेयक कानून बनने के बाद न्यायपालिका की समीक्षा में टिक नहीं पाएगा?
बीजू जनता दल ने किया समर्थन
बीजू जनता दल के प्रसन्न आचार्य ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी पार्टी महिला सशक्तिकरण के पक्ष में हमेशा से रही है। उन्होंने कहा कि बीजद ने लोकसभा चुनाव में जिन प्रत्याशियों को टिकट दिये थे उनमें एक तिहाई महिलाएं थीं और पार्टी की सात प्रत्याशियों ने चुनाव जीते। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने अपने एक निर्णय में तीन तलाक की प्रथा को अवैध ठहराया था। आचार्य ने सरकार से जानना चाहा कि विधेयक में एक तरफ तो तीन तलाक की प्रथा को निरस्त माना गया है और वहीं दूसरी तरफ इसका संज्ञान लेते हुए इसे अपराध माना गया है। उन्होंने कहा कि दोनों बातें एक साथ कैसे चल सकती हैं?
संसद की समीक्षा के विरुद्ध लाया गया बिल: टीएमसी
तृणमूल कांग्रेस की डोला सेन ने कहा कि उनकी पार्टी तीन तलाक के बारे में लाए गए अध्यादेश का इसलिए विरोध कर रही है क्योंकि यह अध्यादेश बिना संसदीय समीक्षा के लाया गया है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में न तो राष्ट्रपति शासन लगा है और न ही तानाशाही है, इसलिए संसद की समीक्षा के बिना कोई भी कानून लाना संविधान की भावना के विरूद्ध है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ भाजपा महिला सशक्तिकरण के बारे में केवल बात ही करती है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इसके लिए वाकई गंभीर है तो उसे महिला आरक्षण संबंधित विधेयक संसद में लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए यदि वर्तमान सत्र का एक और दिन बढ़ाना पड़े तो हमारी पार्टी उसके लिए भी तैयार है।