सवाल: ठाणे की सियासत कठिन हो गई है। कितना चैलेंज हो गया है आपके लिए।
जवाब: देखिए चैलेंज तो बिल्कुल नहीं है और हम तो हमेशा से चुनौतियां ही स्वीकार करते-करते यहां तक आए हैं। इसलिए हम लोग चुनौती तो किसी को मानते हैं।
सवाल: यह बात तो एकनाथ शिंदे की सेना भी कह रही है। वह कहते हैं कि उनके लिए कोई चुनौती नहीं है। तो चुनाव में लड़ाई किससे है।
जवाब: लड़ाई में कोई है ही नहीं। हम लोग धर्मवीर आनंद दिघे और बालासाहेब के विचारों से प्रेरित हैं। हम लोग उससे प्रेरणा लेकर काम करते रहे हैं और उसी के साथ आगे भी काम करेंगे। कोई कुछ भी कहता रहे। लेकिन जनता को सब पता है।
सवाल: ठाणे तो शिवसेना का गढ़ रहा है और यहीं पर अब दो शिवसेना चुनाव लड़ रही हैं। असर तो पड़ेगा न?
जवाब: देखिए, जो शिवसेना उनके पास (एकनाथ शिंदे) है, वह तो भाजपा ने उनको दी है। सही और असली शिवसेना तो ठाकरे घराने की ही है।
सवाल: आपको लगता है कि असली शिवसेना ठाकरे घराने की है। लेकिन दावा तो एकनाथ शिंदे की शिवसेना चुनाव चिन्ह के साथ कर रही है।
जवाब: अब जब गद्दारी हुई है, तो उसमें क्या कर सकते हैं। लेकिन इतना पता है कि यह लोग आएंगे और चले जाएंगे। लेकिन बालासाहेब ठाकरे के विचारों की शिवसेना को कोई खत्म नहीं कर सकता। हमारी पार्टी ही असली शिवसेना है। इसलिए आप देखिएगा उद्धव ठाकरे की ही शिवसेना इस बार चुनकर आने वाली है ।
सवाल: लेकिन ठाणे तो मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का गढ़ है। इसका असर कुछ पड़ेगा यहां के चुनाव पर?
जवाब: कुछ असर नहीं पड़ेगा। यहां के लोगों को पता है कि बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना के साथ गद्दारों ने क्या किया है। दो साल में कैसा राजनीति का खेल खेला गया। सबको पता है। जिनके ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, वह सब तो भारतीय जनता पार्टी के साथ चले गए।
सवाल: पिछले चुनाव में तो आप लोग कांग्रेस और एनसीपी के विरोध में थे। इस बार तो सभी एक हो गए। जवाब तो आपको इस पर भी देना होगा। क्योंकि लोग यह सवाल तो उठाते ही होंगे।
जवाव: यही हमारी ताकत है अब। कांग्रेस, राष्ट्रवादी और आम आदमी पार्टी जैसे दिग्गज राजनीतिक दलों के साथ हम सब लोग मिलकर गद्दारों को सबक सिखाने के लिए मैदान में उतरे हैं। आप बस नतीजों का इंतजार करिए।