शनिवार को छठे चरण के लिए आठ राज्यों में मतदान होना है। इसमें दिल्ली और हरियाणा की सभी सीटें शामिल हैं। जबकि उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, झारखंड और जम्मू कश्मीर शामिल है। केंद्रीय चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 2019 के लोकसभा चुनाव में 58 सीटों पर हुए मतदान में भारतीय जनता पार्टी का जबरदस्त तरीके से पलड़ा भारी था। आंकड़े बताते हैं कि भारतीय जनता पार्टी ने 2019 में 40 सीटों पर कब्जा किया था। जबकि चार सीटों पर बहुजन समाज पार्टी और चार सीटों पर बीजू जनता दल के प्रत्याशी विजयी हुए थे। इसी तरह तीन सीटों पर तृणमूल कांग्रेस और तीन सीटों पर जेडीयू ने जीत हासिल की थी। चुनाव आयोग के आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि 2019 के चुनाव में आज के INDIA गठबंधन के सहयोगी समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल समेत कांग्रेस एक भी सीट नहीं जी सकी थी।
राजनीतिक जानकार और वरिष्ठ पत्रकार मोहम्मद नसरुद्दीन कहते हैं कि यह वही 58 सीटें हैं, जहां पर कभी कांग्रेस का सिक्का चलता था। लेकिन बदली परिस्थितियों और मोदी लहर में कांग्रेस पूरी तरीके से साफ हो गई। केंद्रीय चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि 2009 में इन्हीं 58 सीटों पर कांग्रेस के 22 प्रत्याशी चुनाव जीत कर संसद पहुंचे थे। सियासी जानकार नसरुद्दीन कहते हैं कि 2014 में मोदी लहर इस तरह चली कि कांग्रेस 22 सीटों से सिमट कर महज एक सीट पर आ गई। यह कांग्रेस के लिए बहुत बड़ा झटका था। लेकिन 2019 के चुनाव में इन 58 सीटों में हरियाणा के रोहतक की हिस्से में आई कांग्रेस की महज एक सीट भी हाथ से चली गई। यानी कि 2019 में कांग्रेस के खाते में शून्य आया। राजनीतिक जानकार नसरुद्दीन कहते हैं कि 2009 से लेकर 2019 के बीच में कांग्रेस अर्श से फर्श पर आ गई।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक कांग्रेस जैसे-जैसे नीचे होती गई भाजपा उससे कई गुना स्पीड से आगे बढ़ती गई। 2009 में 58 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के महज सात प्रत्याशी ही चुनाव जीते थे। लेकिन 2014 में आई मोदी लहर में पार्टी ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 7 से 37 सीटों पर अपने प्रत्याशी संसद में पहुंचा दिए। भारतीय जनता पार्टी का यह प्रदर्शन 2014 में ही नहीं, बल्कि 2019 में भी आगे बढ़ा। भारतीय जनता पार्टी ने 2019 में यह संख्या 37 से बढ़कर 40 कर दी। जबकि कभी 22 सीटों से सत्ता पर दावेदारी करने वाली कांग्रेस शून्य पर पहुंच गई।
केंद्रीय चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि यह वही चरण है जिसमें स्थानीय पार्टियों का भी खूब बोलबाला रहा। 2019 के लोकसभा चुनाव में जहां बहुजन समाज पार्टी को चार सीटें मिली। वहीं बीजू जनता दल के हिस्से में भी चार सीटें आई। इन्हीं 58 सीटों पर हुए चुनाव में तृणमूलू कांग्रेस के हिस्से में पिछले चुनाव में तीन सीटें आई थीं। जबकि तीन सीटें जेडीयू के खाते में आईं। इसके अलावा लोक जनशक्ति पार्टी और नेशनल कांफ्रेंस के हिस्से में एक-एक सीट आई। जबकि कुछ सीटें अन्य को भी मिली थीं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यही वजह है 22 सीटों से शून्य पर आने वाली कांग्रेस के लिए 2024 का चुनाव मनोवैज्ञानिक तौर पर बड़ा चुनौती पूर्ण है। क्योंकि कांग्रेस पार्टी अपनी पुरानी सीटों को फिर से पाने की जुगत में लगी है। राजनीतिक विश्लेषक डॉ. अभिषेक शर्मा कहते हैं कि जो स्थिति कांग्रेस की है वही स्थिति समाजवादी पार्टी से लेकर आम आदमी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल तक की बनी हुई है। क्योंकि पिछले चुनाव में इनमें से किसी भी राजनैतिक दल के हिस्से में कोई सीट नहीं आई थी। इस बार ये सभी राजनीतिक दल INDIA गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। इसलिए सियासी समीकरण बदले हुए भी नजर आ रहे हैं। डॉ. अभिषेक कहते हैं कि पिछले चुनाव में यही दल कुछ राज्यों में आमने-सामने थे। हालांकि भारतीय जनता पार्टी अपने पिछले चुनावो के नतीजे के आधार पर मजबूती के साथ अपनी सियासी फील्डिंग सजा चुकी है। इसलिए छठे चरण के 58 सीटों पर होने वाला मतदान बेहद रोचक हो गया है।