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तीन तलाक बिल लोकसभा में तीसरी बार पास, पक्ष में 303 तो विपक्ष में पडे़ 82 वोट

Thu, 25 Jul 2019 09:48 PM IST
अजय सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • सदन में वोटिंग: पक्ष में 303 तो विपक्ष में पडे़ 82 वोट
  • दीवार पर टांगने के लिए नहीं आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला: रविशंकर प्रसाद
  • लोकसभा में आजम खान के 'असंसदीय' बयान पर मचा हंगामा, अखिलेश ने भी दिया साथ
  • तीन तलाक बिल पर ओवैसी ने उठाए सवाल, कहा- औरतों को सड़क पर ला रही है सरकार
  • जदयू ने किया वाक आउट, बीजद का समर्थन
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तीन तलाक (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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विस्तार
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तीन तलाक (तलाक ए बिद्दत) को दंडनीय अपराध की श्रेणी में लाने वाला मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) बिल लोकसभा में बृहस्पतिवार को कई घंटे की चर्चा के बाद तीसरी बार ध्वनिमत से पारित हो गया। बिल में संशोधन के लिए लाए गए विपक्षी सांसदों के प्रस्ताव गिर गए और यह बिल 82 के मुकाबले 303 मतों से पारित हो गया। वहीं, कांग्रेस, बसपा, तृणमूल और एनडीए की सहयोगी जदयू ने भी बिल के मौजूदा स्वरूप का विरोध करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। विरोध में माकपा, द्रमुक और एआईएमआईएम जैसी पार्टियां भी रहीं। वहीं बीजद ने तीन तलाक को दंडनीय अपराध बनाने का विरोध करते हुए समर्थन दिया है। नरेंद्र मोदी सरकार के समक्ष इस बिल को अब राज्यसभा में पास कराना बड़ी चुनौती होगी, जहां एनडीए के पास पर्याप्त बहुमत नहीं है। यह विधेयक तीन अध्यादेश के बाद लोकसभा में तीसरी बार पेश किया गया था। फिलहाल अब सरकार की कोशिश इसे इसी सत्र में राज्यसभा में पास कराने की होगी। मौजूदा सत्र को भी बढ़ा दिया गया है जो अब 7 अगस्त तक चलेगा। 

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इससे पहले  कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विधेयक को निचले सदन में पेश करते हुए कहा, यह विधेयक नारी सम्मान और लैंगिक समानता से जुड़ा है। इस संबंध में आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला दीवार पर टांगने के लिए नहीं है। उन्होंने कहा, एक साथ तीन तलाक पर रोक और सजा के लिए कानून जरूरी है। पाकिस्तान-अफगानिस्तान सहित 20 प्रमुख इस्लामी देशों ने भी तीन तलाक पर प्रतिबंध लगा दिया है।

कांग्रेस बोली, इसे आपराधिक बनाने पर आपत्ति
इस पर कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि राम और रहीम को अगर आप एक मानेंगे तो देश में कानून पारित करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा कि इसे आपराधिक बनाने पर ही हमारा विरोध है, हमारी सलाह के बाद आपने 3 संशोधन किए हैं, लेकिन आप अपनी बात घुमा फिराकर बिल में लेकर आए हैं। वहीं, तृणमूल कांग्रेस सांसद सुदीप बंधोपाध्याय ने कहा कि हमारी शंकाओं को दूर नहीं किया गया है और न ही सरकार की ओर से जवाब दिया गया, विरोध स्वरूप हम सदन से वॉक आउट करते हैं।
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मैं मोदी सरकार मंत्री, राजीव का नहीं: प्रसाद
लोकसभा में कानून मंत्री ने कहा कि पीड़ित महिलाएं जब पुलिस में जाती थीं तो पुलिस के पास कार्रवाई का हक नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसी महिलाओं को क्या सड़क पर छोड़ दें। प्रसाद ने कहा कि मैं नरेंद्र मोदी सरकार का मंत्री हूं, राजीव गांधी सरकार का नहीं। उन्होंने कहा कि अगर 1986 में यह काम हो गया होता तो हमारे लिए नहीं छोड़ा गया होता। उन्होंने कहा कि समझौते का विकल्प खुला है और हमने हिंदुओं के खिलाफ कानून को आपराधिक बनाया है तो किसी को दिक्कत क्यों नहीं हुई। उन्होंने कहा कि दहेज और घरेलू हिंसा के लिए भी कानून है।

अमर उजाला का हवाला देकर बताया 2017 से अब तक 574 मामले उजागर
प्रसाद ने कहा, अमर उजाला सहित विभिन्न स्रोतों से वर्ष 2017 से अब तक 574 मामले उजागर हुए हैं। इसमें सब्जी में नमक तेज होने, खाना ठीक से नहीं पकाने जैसे मामूली मामलों में तीन तलाक दिया गया। सबसे अधिक दुरुपयोग उत्तर प्रदेश में हुआ है, जहां राज्य सरकार इस मामले में अब सख्ती दिखा रही है। सवाल है कि ऐसी महिलाओं के खिलाफ अन्याय क्यों जारी रहना चाहिए।
 

नकवी बोले, ऐसा काम ही क्यों करें कि जेल हो


केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि कुछ लोग जेल जाने के प्रावधान का विरोध कर रहे हैं, लेकिन ऐसा काम ही क्यों करें कि जेल काटनी पड़े। शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने के राजीव गांधी सरकार के फैसले का जिक्र करते हुए नकवी ने कहा कि 1986 की खता की आज तक मुस्लिम महिलाओं को सजा मिल रही है। यह देश इस बात का गवाह है कि सती प्रथा, बाल विवाह, विधवा विवाह पर रोक जैसी कुप्रथाओं को दूर किया है। तीन तलाक भी उसी तरह की कुप्रथा है, जो इस पर तर्क दे रहे हैं कि पति जेल चला जाएगा तो घर कौन देखेगा। भाई ऐसा काम ही क्यों करो कि जेल जाना पड़ेगा। यह तो ऐसी बात हुई कि हमने कत्ल किया तो परिवार की देखभाल कौन करेगा। यह तर्क नहीं कुतर्क है। नकवी ने एक गजल की चार पंक्तियां भी सुनाईं। 

"न हमसफर न हमनशीं से निकलेगा, हमारे पांव का कांटा, हमीं से निकलेगा।
मेरे जुनूं का नतीजा जरूर निकलेगा, इसी स्याह समंदर से नूर निकलेगा।।"


लेखी बोलीं, निकाह बना मजाक, तलाक, तलाक, तलाक हो गया
भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने कहा कि निकाह निकाह न रहा, मजाक बन गया। तलाक, तलाक, तलाक और तलाक हो गया। कुछ करने की जरूरत नहीं। आपने कहा और खत्म। एक बेबस औरत बच्चों के साथ घर के बाहर। एक औरत क्या सिर्फ बीवी होती है, उसके कोई मां-बाप नहीं हैं। उसका क्या कोई परिवार नहीं है। क्या वह किसी की बहन नहीं है। क्या वह किसी की बेटी नहीं है। जो लोग धर्म के नाम पर साक्ष्य देना चाहते हैं तो मैं उनको बता दूं कि धर्म के प्रति कानून अंधा है। इस बीच एसपी प्रमुख अखिलेश यादव ने बीच में टीका टिप्पणी की, जिस पर लेखी ने कहा, अन्याय का सबसे मुख्य कारण वे शरिया अदालतें हैं, जो इनके समय चलती रहीं। मुख्यमंत्री थे यह। किस तरह के मुख्यमंत्री थे यह? जो मुस्लिम महिलाओं के हकूकों को नहीं बचा सके। इस बयान के बाद अखिलेश यादव अपनी सीट से खड़े होकर विरोध जताने लगे।
 

राज्यसभा में एनडीए की स्थिति

245 सदस्यीय राज्यसभा में बहुमत के लिए 123 का आंकड़ा चाहिए। अभी एनडीए के पास कुल मिलाकर 115 सांसदों का समर्थन है। माना जा रहा है कि एनडीए के साथ ये दल भी साथ आ सकते हैं, जिनमें
बीजद (5), वाईएसआरसी के पास (2), टीआरएस के पास (6), जबकि नगा पीपुल्स फ्रंट (3) हैं। इनके पास कुल 14 सांसद हैं। ऐसे में अगर इनका समर्थन मिलता है तो ऊपरी सदन में एनडीए को बहुमत मिल जाएगा।

विरोध में किसने क्या कहा?
  • जब तीन तलाक का आरोपी पति जेल में होगा तो वह पत्नी और बच्चों को गुजारा भत्ता कैसे देगा? एन के प्रेमचंद्रन, आरएसपी, कोल्लम
  • मैं जानना चाहती हूं कि जब विवाह कभी आपराधिक मामला नहीं हुआ तो तलाक कैसे अपराध हो गया:  कनिमोझी करुणानिधि, डीएमके
  • आपसी कानून को बनाकर पति-पत्नी के रिश्ते तय नहीं कर सकते। तलाक को कोई भी पसंद नहीं करेगा। आपको कानून बनाने के बजाए उस समुदाय के लिए जन-जागृति पैदा करने का हर संभव उपाय करना चाहिए। -राजीव रंजन सिंह (लल्लन सिंह) जदयू
  • बिल में कई बातें साफ तौर पर नहीं कही गई हैं। पति के जेल में जाने से महिला पर वित्तीय संकट भी आ जाएगा।-मिथुन रेड्डी, जगनमोहन रेड्डी (वाईएसआरसीपी) की पार्टी से सांसद 
  • कानून की ये बात कर रहे हैं, सुप्रीम कोर्ट की बात कर रहे हैं। आखिर ऐसी क्या वजह है जो सिविल ऑफेंस को को क्रिमिनल में बदलना चाहते हैं।-दानिश अली, बसपा
  • यह कानून मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ है। सबूत देने की जिम्मेदारी भी महिलाओं पर डाली जा रही है। शौहर को जेल में डालेंगे तो वो गुजारा-भत्ता कैसे देगा। -असदुद्दीन ओवैसी, एआईएमआईएम (तीन तलाक पर)-पीडीपी

समर्थन में किसने क्या कहा?
-अगर आज बाला साहेब जिंदा होते तो भारत माता के सुपुत्र नरेंद्र मोदी और रविशंकर प्रसाद का इस बिल के लिए स्वागत करते। - विनायक राउत, शिवसेना
-इस अधिनियम की मंशा कानून के जरिए महिलाओं को तत्काल तलाक की वजह से पैदा हुई असुरक्षा की भावना को खत्म करने की है। लगभग सभी मुस्लिम देश ने इस बिल को खत्म किया है इसलिए हम इसका समर्थन करते हैं।- अनुभव मोहंती, बीजद
-सवाल बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक समुदायों का नहीं है, बल्कि महिलाओं के अधिकारों का है।-रवींद्रनाथ कुमार, अन्नाद्रमुक 

सपा सांसद के विवादित बोल, बीवी को गोली मारने से अच्छा है तलाक दे दें
इस बीच, सपा सांसद एसटी हसन ने तीन तलाक को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने संसद से बाहर निकलते हुए कहा, बीवी को गोली मारने से अच्छा है कि उसे तलाक दे दें। सरकार को किसी भी मजहब के निजी मामले में दखल नहीं देना चाहिए। इसे सिर्फ एक फिरका मानता है। एक साथ तीन तलाक को सभी लोग नहीं मानते और एक महीने का अंतराल रखा जाता है।
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ऐसे समझें नया विधेयक

  • यह अपराध संज्ञेय (इसमें पुलिस सीधे गिरफ्तार कर सकती है) तभी होगा, जब महिला खुद शिकायत करेगी। इसके साथ ही खून या शादी के रिश्ते वाले सदस्यों के पास भी केस दर्ज करने का अधिकार रहेगा। पड़ोसी या कोई अनजान शख्स इस मामले में केस दर्ज नहीं कर सकता है।
  • यह बिल महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए है। कानून में समझौते के विकल्प को भी रखा गया है। पत्नी की पहल पर ही समझौता हो सकता है, लेकिन मजिस्ट्रेट के द्वारा उचित शर्तों के साथ।
  • तीन तलाक को गैर जमानती बनाया गया है। हालांकि कानून के तहत मजिस्ट्रेट इसमें पत्नी का पक्ष सुनने के बाद जमानत दे सकता है। चूंकि यह पति-पत्नी के बीच का निजी मामला है। पत्नी ने गुहार लगाई है, इसलिए उसका पक्ष सुना जाना जरूरी होगा। ैर जमानती अपराधों में पुलिस या थाने द्वारा जमानत नहीं दी जा सकती है।
  • तीन तलाक पर कानून में छोटे बच्चों की कस्टडी मां को दिए जाने का प्रावधान है। पत्नी और बच्चे के भरण-पोषण का अधिकार मजिस्ट्रेट तय करेंगे, जिसे पति को देना होगा।
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