245 सदस्यीय राज्यसभा में बहुमत के लिए 123 का आंकड़ा चाहिए। अभी एनडीए के पास कुल मिलाकर 115 सांसदों का समर्थन है। माना जा रहा है कि एनडीए के साथ ये दल भी साथ आ सकते हैं, जिनमें
बीजद (5), वाईएसआरसी के पास (2), टीआरएस के पास (6), जबकि नगा पीपुल्स फ्रंट (3) हैं। इनके पास कुल 14 सांसद हैं। ऐसे में अगर इनका समर्थन मिलता है तो ऊपरी सदन में एनडीए को बहुमत मिल जाएगा।
विरोध में किसने क्या कहा?
- जब तीन तलाक का आरोपी पति जेल में होगा तो वह पत्नी और बच्चों को गुजारा भत्ता कैसे देगा? एन के प्रेमचंद्रन, आरएसपी, कोल्लम
- मैं जानना चाहती हूं कि जब विवाह कभी आपराधिक मामला नहीं हुआ तो तलाक कैसे अपराध हो गया: कनिमोझी करुणानिधि, डीएमके
- आपसी कानून को बनाकर पति-पत्नी के रिश्ते तय नहीं कर सकते। तलाक को कोई भी पसंद नहीं करेगा। आपको कानून बनाने के बजाए उस समुदाय के लिए जन-जागृति पैदा करने का हर संभव उपाय करना चाहिए। -राजीव रंजन सिंह (लल्लन सिंह) जदयू
- बिल में कई बातें साफ तौर पर नहीं कही गई हैं। पति के जेल में जाने से महिला पर वित्तीय संकट भी आ जाएगा।-मिथुन रेड्डी, जगनमोहन रेड्डी (वाईएसआरसीपी) की पार्टी से सांसद
- कानून की ये बात कर रहे हैं, सुप्रीम कोर्ट की बात कर रहे हैं। आखिर ऐसी क्या वजह है जो सिविल ऑफेंस को को क्रिमिनल में बदलना चाहते हैं।-दानिश अली, बसपा
- यह कानून मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ है। सबूत देने की जिम्मेदारी भी महिलाओं पर डाली जा रही है। शौहर को जेल में डालेंगे तो वो गुजारा-भत्ता कैसे देगा। -असदुद्दीन ओवैसी, एआईएमआईएम (तीन तलाक पर)-पीडीपी
समर्थन में किसने क्या कहा?
-अगर आज बाला साहेब जिंदा होते तो भारत माता के सुपुत्र नरेंद्र मोदी और रविशंकर प्रसाद का इस बिल के लिए स्वागत करते। - विनायक राउत, शिवसेना
-इस अधिनियम की मंशा कानून के जरिए महिलाओं को तत्काल तलाक की वजह से पैदा हुई असुरक्षा की भावना को खत्म करने की है। लगभग सभी मुस्लिम देश ने इस बिल को खत्म किया है इसलिए हम इसका समर्थन करते हैं।- अनुभव मोहंती, बीजद
-सवाल बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक समुदायों का नहीं है, बल्कि महिलाओं के अधिकारों का है।-रवींद्रनाथ कुमार, अन्नाद्रमुक
सपा सांसद के विवादित बोल, बीवी को गोली मारने से अच्छा है तलाक दे दें
इस बीच, सपा सांसद एसटी हसन ने तीन तलाक को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने संसद से बाहर निकलते हुए कहा, बीवी को गोली मारने से अच्छा है कि उसे तलाक दे दें। सरकार को किसी भी मजहब के निजी मामले में दखल नहीं देना चाहिए। इसे सिर्फ एक फिरका मानता है। एक साथ तीन तलाक को सभी लोग नहीं मानते और एक महीने का अंतराल रखा जाता है।