कांग्रेस के सांसद राहुल कासवान ने लोकसभा में शहीद हुए भारतीय सैनिकों को लेकर कुछ सवाल पूछे। इस पर गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने जवाब दिया। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों के दौरान भारत-पाक सीमा पर आतंकवादी हमलों में पांच भारतीय सैनिक शहीद हुए।
दरअसल, राहुल कासवान ने चार सवाल पूछे थे वह यह हैं-
गत तीन वर्षों के दौरान भारत-पाक सीमा पर आतंकवादी हमलों में शहीद हुए भारतीय सैनिकों का वर्ष-वार ब्यौरा क्या है?
इस संबंध में सरकार द्वारा क्या कुछ कार्रवाई की गई?
आतंकवादी समूहों का पूर्णतः सफाया कब तक होने की संभावना है?
सरकार द्वारा इस संबंध में क्या उपाय किए गए हैं?
केंद्र ने दिया ये जवाब
इस पर गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि पिछले तीन सालों यानी 2021 से 2023 के दौरान भारत-पाकिस्तान सीमा पर आतंकवादी हमलों में भारतीय सैनिकों के हताहत होने की संख्या पांच है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने भारत-पाक सीमा सहित आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है और सरकार का दृष्टिकोण आतंकवादी पारिस्थितिकी तंत्र को नष्ट करना है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने कई उपाय किए हैं, जिसके परिणामस्वरूप सीमा पर आतंकवादी गतिविधियों को नियंत्रित करने में मदद मिली है।
'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम को दी मंजूरी'
उन्होंने आगे कहा, 'केंद्र सरकार ने अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के 19 जिलों में उत्तरी सीमा से सटे 46 ब्लॉकों में चुनिंदा गांवों के व्यापक विकास के लिए 15 फरवरी, 2023 को केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (वीवीपी) को मंजूरी दी है। इस कार्यक्रम के तहत कवर किए गए कुल गांव 692 हैं।'
गांवों में रहने के लिए लोगों को प्रोत्साहन देना मकसद
मंत्री ने बताया कि कार्यक्रम में पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने, कौशल विकास और उद्यमिता और कृषि/बागवानी, औषधीय पौधों/जड़ी-बूटियों की खेती आदि सहित सहकारी समितियों के विकास के माध्यम से आजीविका सृजन के अवसरों के निर्माण के लिए चुनिंदा गांवों में हस्तक्षेप के केंद्रित क्षेत्रों की परिकल्पना की गई है। हस्तक्षेपों में असंबद्ध गांवों को सड़क संपर्क, गांव के बुनियादी ढांचे, नवीकरणीय ऊर्जा सहित ऊर्जा, टेलीविजन और दूरसंचार कनेक्टिविटी प्रदान करना भी शामिल है। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को चयनित गांवों में रहने के लिए काफी प्रोत्साहन देता है।
मनरेगा के तहत हर साल 60 लाख नए जॉब कार्ड जारी किए जाते हैं: सरकार
केंद्र ने मंगलवार को कहा कि मनरेगा के तहत हर साल औसतन 60 लाख नए जॉब कार्ड जारी किए जाते हैं और जॉब कार्ड को निरस्त करने में सरकार की कोई भूमिका नहीं होती है।
ग्रामीण विकास राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने लोकसभा में कहा कि ग्रामीण विकास बजट का 57 प्रतिशत महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के लिए आवंटित किया गया है और जोर देकर कहा कि आधार कार्ड के जुड़ने से पारदर्शिता बढ़ती है।
कांग्रेस नेता के सी वेणुगोपाल ने दावा किया कि पिछले चार साल में 10.43 करोड़ मनरेगा कामगारों के नाम काटे गए हैं।