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वीवीपैट पर विपक्ष को झटका, सीजेआई ने कहा- 'एक ही मामले को बार-बार क्यों सुनें?'

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Tue, 07 May 2019 11:30 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI

सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) और वीवीपैट की पर्चियों के मिलान वाली विपक्ष की याचिका खारिज कर दी है। इसके लिए कुल 21 विपक्षी दलों ने याचिका दायर की थी। ये दल चाहते थे कि चुनाव आयोग 50 फीसदी वीवीपैट पर्चियों के ईवीएम से मिलान का आदेश दे।
 



कोर्ट के फैसले के बाद याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि 21 दलों में पूर्व और आज के मुख्यमंत्री शामिल थे। हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। हमारी मांग की वजह से एक की बजाय पांच बूथ पर वीवीपैट मिलान की बात स्वीकारी गई है।

वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें इस मामले में दखलअंदाजी नहीं करनी है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई का कहना है कि एक ही मामले को बार-बार क्यों सुनें?

सुप्रीम कोर्ट का पिछला आदेश

बीते महीने सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि मतगणना के लिए ईवीएम के साथ लगी वीवीपैट की पर्चियों के मिलान की प्रक्रिया प्रति विधानसभा क्षेत्र में एक मतदान केंद्र से बढ़ाकर पांच मतदान केंद्र की जाए।

हालांकि, कोर्ट ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम 50 फीसदी पर्चियों का मिलान करने का विपक्षी नेताओं का अनुरोध तब भी अस्वीकार कर दिया था। 

पुनर्विचार याचिका में कहा गया था कि वीवीपैट पर्चियों के मिलान में सिर्फ दो फीसदी की वृद्धि पर्याप्त नहीं होगी और इससे न्यायालय के आदेश से पहले की स्थिति में बहुत अधिक बदलाव नहीं आएगा। इससे चुनाव प्रक्रिया में जनता का विश्वास बढ़ाने का मकसद भी पूरा नहीं हो पाएगा। 

मिलान के लिए पांच मतदान केंद्र पर्याप्त नहीं 

आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में इन विपक्षी दलों के नेताओं ने पुनर्विचार याचिका में कहा था कि वीवीपैट पर्चियों के औचक मिलान के लिए एक मतदान केंद्र से बढ़ाकर पांच मतदान केंद्र करना पर्याप्त नहीं है और इससे न्यायालय द्वारा अपेक्षित संतोषप्रद नतीजे नहीं मिलेंगें।
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याचिका में निर्वाचन आयोग की इस दलील का विरोध किया गया है कि चुनाव नजदीक हैं और ऐसी स्थिति में ईवीएम के साथ वीवीपैट की पर्चियों के मिलान की संख्या को बढ़ाना व्यावहारिक नहीं है। 

याचिका में कहा गया था कि मिलान के लिए व्यावहारिक संख्या तर्कसंगत होनी चाहिए। याचिका में आरोप लगाया गया था कि आंध्रप्रदेश में अनेक मतदान केंद्रों पर वीवीपैट मशीनें सही तरीके से काम नहीं कर रही थीं। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) और वीवीपैट की पर्चियों के मिलान वाली विपक्ष की याचिका खारिज कर दी है। इसके लिए कुल 21 विपक्षी दलों ने याचिका दायर की थी। ये दल चाहते थे कि चुनाव आयोग 50 फीसदी वीवीपैट पर्चियों के ईवीएम से मिलान का आदेश दे।
 

कोर्ट के फैसले के बाद याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि 21 दलों में पूर्व और आज के मुख्यमंत्री शामिल थे। हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। हमारी मांग की वजह से एक की बजाय पांच बूथ पर वीवीपैट मिलान की बात स्वीकारी गई है।

वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें इस मामले में दखलअंदाजी नहीं करनी है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई का कहना है कि एक ही मामले को बार-बार क्यों सुनें?

सुप्रीम कोर्ट का पिछला आदेश

बीते महीने सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि मतगणना के लिए ईवीएम के साथ लगी वीवीपैट की पर्चियों के मिलान की प्रक्रिया प्रति विधानसभा क्षेत्र में एक मतदान केंद्र से बढ़ाकर पांच मतदान केंद्र की जाए।

हालांकि, कोर्ट ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम 50 फीसदी पर्चियों का मिलान करने का विपक्षी नेताओं का अनुरोध तब भी अस्वीकार कर दिया था। 

पुनर्विचार याचिका में कहा गया था कि वीवीपैट पर्चियों के मिलान में सिर्फ दो फीसदी की वृद्धि पर्याप्त नहीं होगी और इससे न्यायालय के आदेश से पहले की स्थिति में बहुत अधिक बदलाव नहीं आएगा। इससे चुनाव प्रक्रिया में जनता का विश्वास बढ़ाने का मकसद भी पूरा नहीं हो पाएगा। 

मिलान के लिए पांच मतदान केंद्र पर्याप्त नहीं 

आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में इन विपक्षी दलों के नेताओं ने पुनर्विचार याचिका में कहा था कि वीवीपैट पर्चियों के औचक मिलान के लिए एक मतदान केंद्र से बढ़ाकर पांच मतदान केंद्र करना पर्याप्त नहीं है और इससे न्यायालय द्वारा अपेक्षित संतोषप्रद नतीजे नहीं मिलेंगें।

याचिका में निर्वाचन आयोग की इस दलील का विरोध किया गया है कि चुनाव नजदीक हैं और ऐसी स्थिति में ईवीएम के साथ वीवीपैट की पर्चियों के मिलान की संख्या को बढ़ाना व्यावहारिक नहीं है। 

याचिका में कहा गया था कि मिलान के लिए व्यावहारिक संख्या तर्कसंगत होनी चाहिए। याचिका में आरोप लगाया गया था कि आंध्रप्रदेश में अनेक मतदान केंद्रों पर वीवीपैट मशीनें सही तरीके से काम नहीं कर रही थीं। 

ईवीएम-वीवीपैट (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

अभी कैसे होता है मिलान?

फिलहाल चुनाव आयोग हर क्षेत्र से कोई भी एक ईवीएम चुनकर उसकी पर्चियों का मिलान करता है। अभी देश में कुल 10.35 लाख मतदान केंद्र हैं। वहीं एक विधानसभा सीट में औसतन 250 मतदान केंद्र हैं। आयोग के मुताबिक एक मतदान केंद्र पर वीवीपैट गिनती में एक घंटे का वक्त लग जाता है। अगर इसे 50 फीसदी तक बढ़ा दिया जाए तो इसमें औसतन 5.2 दिन लगेंगे।

ये याचिका विपक्षी दलों की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने दायर की थी। उनका कहना है कि ऐसा करने से चुनाव परिणाम की घोषणा में तीन से चार घंटे की देरी होगी। लेकिन लोगों का चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा बढ़ेगा।

क्या आरोप थे विपक्ष के?

एन. चंद्रबाबू नायडू का कहना है कि दुनिया के 191 देशों में से मात्र 18 देशों ने ईवीएम को अपनाया है, जिनमें से 3 देश 10 सबसे अधिक आबादी वाले हैं। उनका मानना है कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है और उनमें गड़बड़ी भी पैदा होती है।

इसके साथ ही इनकी प्रोग्रामिंग भी की जा सकती है। उन्होंने यह जानने की मांग की थी कि नए वीवीपैट में वोटर स्लिप मात्र तीन सेकेंड में कैसे दिखाई देता है, जबकि इसे सात सेकेंड में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा ईवीएम से छेड़छाड़ कर वोट हासिल कर सकती है।
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