समन्वय समिति के सदस्यों को चार-पांच मिनट बोलने का समय दिया गया। कुलदीप बिश्नोई और कैप्टन अजय यादव को छोड़कर समन्वय समिति के बाकी सदस्य मंच पर मौजूद थे। हालांकि बिश्नोई के भाई एवं प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन मंच पर बैठे हुए थे।
बाकी सदस्यों में समन्वय समिति के चेयरमैन भूपेंद्र हुड्डा, रणदीप सुरजेवाला, महेंद्र प्रताप सिंह, दीपेंद्र हुड्डा, नवीन जिंदल, कैलाशो सैनी, अनिल ठक्कर, कुलदीप शर्मा, जयवीर सिंह बाल्मीकी और सरदार जयपाल सिंह लाली कार्यकर्ता सम्मेलन में पहुंचे थे। गुलाम नबी आजाद ने कहा, प्रदेश कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है। उन्होंने लोकसभा चुनाव में सभी दस सीटें जीतने का दावा किया।पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को दस में से केवल एक ही सीट पर जीत हासिल हुई थी। सात सीटों पर भाजपा और दो सीटें इनेलो के खाते में गई थी।
दीपेंद्र हुड्डा को छोड़कर कांग्रेस के सभी दिग्गज अपनी सीट बचाने में असफल रहे। इसके बाद अशोक तंवर को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन कांग्रेस में गुटबाजी खत्म नहीं हो सकी। यहां तक कि अशोक तंवर की कई जनसभाओं और यात्राओं में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा शामिल नहीं हुए।
हुड्डा ने अपने स्तर पर जो कार्यक्रम आयोजित किए, वहां अशोक तंवर खेमा नदारद रहा। कुमारी शैलजा, किरण चौधरी, कुलदीप बिश्नोई और कैप्टन अजय यादव जैसे बड़े नेता भी एक साथ नहीं चले। हालांकि किरण चौधरी और अशोक तंवर जरुर एक मंच पर दिखाई देते रहे हैं।