अपनी पत्नी के साथ शाहनवाज हुसैन (फाइल फोटो)
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बतौर सांसद ऐसा रहा राजनीतिक करियर
1999 में शाहनवाज किशनगंज के सांसद बने थे। उन्होंने दो लाख 58 हजार 35 मत पाए और दो लाख 49 हजार 387 मत पाने वाले तस्लीमुद्दीन को 8,648 मतों से पराजित कर दिया। 2004 में वह फिर से लड़े, लेकिन दो लाख 59 हजार 834 वोट पाकर चार लाख 20 हजार 331 मत लाने वाले तस्लीमुद्दीन से हार गए। साल 2009 में पार्टी ने उन्हें भागलपुर बुलाया। यहां उन्होंने कांग्रेस के शकुनी चौधरी को 55 हजार से ज्यादा मतों से हरा दिया और भागलपुर के सांसद बन गए। 2014 का लोकसभा चुनाव उनके लिए बुरा साबित हुआ।
मोदी लहर के बावजूद हार गए थे शाहनवाज
शाहनवाज को पिछले लोकसभा चुनाव में शिकस्त झेलनी पड़ी थी। देश भर में नरेंद्र मोदी के नाम की लहर थी, लेकिन मोदी लहर के बीच उन्हें अप्रत्याशित हार मिली। भागलपुर लोकसभा सीट पर मजबूत स्थिति होने के बावजूद वह एक सीटिंग विधायक उम्मीदवार से हार गए। उनके विरोध में राजद से बिहपुर विधायक रहे शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल खड़े हुए थे, जबकि जदयू ने भी अबु कैसर को खड़ा कर दिया। इस चुनाव में शाहनवाज को तीन लाख 58 हजार 138 मत मिले, लेकिन तीन लाख 67 हजार 623 मत लाने वाले राजद उम्मीदवार बुलो मंडल से महज 9,485 मतों के अंतर से हार गए।
जिसकी केंद्र में सरकार, उसे भागलपुर में मिली है हार
भागलपुर लोकसभा सीट का समीकरण पिछले दो दशकों से अलग ही रहा है। केंद्र में सरकार बनाने में भागलपुर की भूमिका नहीं रही है। भागलपुर सीट पर जिस पार्टी का उम्मीदवार जीता है, केंद्र में उसकी विरोधी पार्टी की ही सरकार बनी है। साल 1999 में सीपीएम से सुबोध राय सांसद बने थे, जबकि केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार थी। साल 2004 में भाजपा के सुशील मोदी जीते, तो केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनी। किशनगंज से हार चुके शाहनवाज हुसैन को 2009 में भागलपुर लाया गया, वह जीत कर सांसद भी बनें, लेकिन केंद्र में एक बार फिर मनमोहन सिंह की कांग्रेस सरकार बनी। पिछली बार लोकसभा चुनाव 2014 में शाहनवाज हारे, राजद के बुलो मंडल जीते, लेकिन केंद्र में मोदी सरकार बनी।
भाजपा की अपील: पीएम मोदी के लिए एनडीए को जिताएं
भागलपुर के भाजपा नेता विजय साह खुद भी सूची जारी होने के पहले तक आशान्वित रहे और कार्यकर्ताओं में भी जोश भरते रहे। वह अपनी उम्मीद पर कायम रहे कि मंथन जारी है, हुसैन ही भागलपुर से एनडीए के उम्मीदवार होंगे। सूची जारी होने के बाद वह शांत हैं। नवगछिया बाजार के भाजपा समर्थक व्यवसाई अजय शंकर प्रसाद यह मानने लगे हैं कि भाजपा पार्टी से व्यक्ति हो चली है। उनका कहना है कि शाहनवाज जैसे सर्वमान्य नेता को टिकट नहीं देने से मतदान प्रतिशत पर भी असर पड़ेगा। लोगों के बीच चर्चा हो रही है कि वोट देने किसके लिए निकलेंगे।
इधर, बिहार भाजपा ने फेसबुक पर एनडीए उम्मीदवारों की सूची जारी करते हुए सभी को चुनाव जिताने की अपील की है। लिखा है कि हमें विश्वास है कि बिहार की जनता आपको भारी बहुमत से विजयी बना कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के 'सबका साथ सबका विकास' और 'नए भारत' के संकल्प को आगे बढ़ाएगी।