दिल्ली यूनिवर्सटी के खालसा कॉलेज में राजनीतिशास्त्र के प्रोफेसर नचिकेता सिंह का मानना इस मामले में कुछ दूसरा ही है। वह कहते हैं कि राहुल ने पिछले 14 महीने में संवाद का तरीका बदला है। वह अब सीधे लोगों से मिल रहे हैं। ग्राउंड पर जाकर किसानों के बीच मुखातिब हो रहे हैं। संसद के भीतर उनका आक्रमक रवैया सभी ने देखा है। इससे पता चलता है कि राजनीति पर राहुल गांधी की समझ अब संजीदा बन रही है। वह हर बात को तर्क और सबूतों के तराजू पर तोलकर बोल रहे हैं।
नचिकेता कहते हैं कि जहां भाजपा में वरिष्ठ नेताओं को साइड लाइन करने से विद्रोह जैसी परिस्थितियां पैदा हुई हैं, जो कि न ही सरकार के लिए अच्छा है और न ही पार्टी के लिए। राहुल ने इससे सीखा है कि अगर कांग्रेस को आगे बढ़ाना है तो पार्टी में युवाओं के साथ ही बुजुर्ग नेताओं को भी साथ लेकर चलना पड़ेगा। वह कहते हैं-
राहुल जानते हैं कि ओल्ड को किनारे करके यंग की राजनीति नहीं की जा सकती है।
नचिकेचा कहते हैं कि आपको पंजाब से लेकर दूसरे राज्यों में कांग्रेस में ही बुजुर्ग नेता मिलेंगे राहुल समझते हैं कि युवाओं को बढ़ावा देना है तो पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर चलना पड़ेगा। वह कहते हैं-
यह सही है कि राहुल में अभी बहुत-सी कमियां हैं। लेकिन वह कमजोर नेता नहीं है। भाजपा ने उनकी छवि कमजोर नेता की बना दी थी जिसे उन्होंने आक्रमक छवि के जरिए काउंटर किया है।
नचिकेता कहते हैं कि राहुल को ऐसी छवि बनानी होगी कि उन्हें क्षेत्रिय पार्टियां का भी भरपूर साथ मिल सके। उन्हें इस वक्त भाजपा के अलावा क्षेत्रीय पार्टियों से भी चैलेंज आ रहा है। ममता बनर्जी, चंद्रबाबू नायडू और मायावती ये सभी मझे हुए हैं, उम्र में भी राहुल गांधी से बड़े हैं और राजनीतिक अनुभव भी ज्यादा है। ऐसे में इनके बीच विपक्ष का सर्वमान्य चेहरा बनकर उभरना राहुल के थोड़ा मुश्किल है.....।
राहुल गांधी के सॉफ्ट हिंदुत्व पर नचिकेता कहते हैं-
हिंदू वोट पाने के लिए कांग्रेस को कुछ तो करना ही होगा। राहुल की राजनीति हिंदुत्व की नहीं बल्कि व्यवहारिक है।
ऐसा नहीं है कि राहुल गांधी सोनिया गांधी के अध्यक्ष रहते खुलकर काम नहीं कर पा रहे थे। यह जरूर है कि उस वक्त जवाबदेही उनकी नहीं थी लेकिन जब आपकी जवाबदेही बनती है तो जिम्मेदारी भी बढ़ती है। राहुल गांधी के पास तथ्य और तर्क हैं तभी वह भाजपा के खिलाफ आक्रमक हो रहे हैं। नचिकेता का मानना है कि कांग्रेस कल्चर में कोई बदलाव नहीं आया है। 14 महीने बदलाव के लिए ज्यादा नहीं हैं। बता दें कि राहुल अध्यक्ष बनने के बाद अपने पहले भाषण में भारतीय जनता पार्टी के प्रति अटैकिंग रवैये में दिखे थे। उन्होंंने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा था कि वह गुस्सा करते हैं, हम प्यार करते हैं। वो तोड़ते हैं, हम जोड़ते हैं।