उन्होंने बताया कि प्रियंका सीतामढ़ी और रामपुर होते हुए विंध्याचल मंदिर में दर्शन करेंगी। फिर वह चुनार जाएंगी और शीतला माता मंदिर में दर्शन करेंगी। इसके बाद उनका वाराणसी के अस्सी घाट पहुंचने का कार्यक्रम है जहां उनका स्वागत होगा और इसके साथ ही उनकी इस यात्रा का समापन होगा। प्रियंका 20 मार्च को काशी विश्वनाथ के दर्शन करेंगी और फिर दिल्ली रवाना होंगी।
लखनऊ विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के विभागाध्यक्ष रहे प्रोफेसर रमेश दीक्षित ने 'भाषा' से कहा, 'मेरी स्मृति में उत्तर प्रदेश में नदी मार्ग का उपयोग चुनाव प्रचार के लिए या यों कहें जनता से चुनावी संवाद के लिए पहली बार किया जा रहा है।' उन्होंने कहा, 'यह एक अलग तरीका है। उससे प्रियंका चर्चा में रहेंगी। यह प्रचार का तरीका होता है।'
यह पूछा गया कि नदी किनारे कौन सा वर्ग है जिन्हें साधने का प्रयास शायद प्रियंका कर रही हैं? दीक्षित ने कहा कि नदी के किनारे आम तौर पर केवट, निषाद और मल्लाह रहते हैं। कुल मिलाकर अन्य पिछडे़ वर्ग का एक बड़ा वर्ग वहां निवास करता है।
राजनीतिक विश्लेषक प्रद्युम्न कुमार तिवारी ने कहा कि वाराणसी से प्रयागराज के बीच नदी मार्ग संचालित हो रहा है। यह अभी हाल ही में शुरू हुआ है इसलिए इसका उपयोग भी हो रहा है। इससे पहले नदी मार्ग नहीं था तो नदी मार्ग से प्रचार का प्रश्न कहां उठता था। गौरतलब है कि 23 जनवरी को कांग्रेस की महासचिव-प्रभारी नियुक्त होने के बाद से प्रियंका पार्टी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं से लगातार मुलाकात कर रही हैं।