मोदी सरकार के सबसे लोकप्रिय मंत्रियों में शुमार नितिन गडकरी ने बात कम, काम ज्यादा का रास्ता अपनाया और नतीजा यह कि केंद्रीय मंत्रियों में उनका रिपोर्ट कार्ड बेहद आकर्षक है। केंद्रीय परिवहन मंत्री के रूप में उनके काम, रसूख और संघ से नजदीकी की वजह से यह चर्चा भी छिड़ी कि लोकसभा चुनाव नतीजों में यदि थोड़ी ऊंच-नीच हुई तो गडकरी प्रधानमंत्री पद के दावेदार भी हो सकते हैं।
अपने गृहनगर और संसदीय क्षेत्र नागपुर (महाराष्ट्र) में दूसरी बार परचम फहराने के लिए प्रचार में जुटे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से विशेष बातचीत की रवि बुले ने।
सवाल-2014 में भाजपा सत्ता में आने के लिए वोट मांग रही थी, अब सत्ता में रहने के लिए। क्या फर्क और तर्क हैं पार्टी के?
पिछली बार हमारे प्रचार को लेकर लोगों के मन में आशाएं-आकांक्षाएं थीं। उस समय की सरकार के प्रति असंतोष था। इस माहौल में हम चुनाव जीते। अब 2019 में हम अपने काम लेकर लोगों के बीच जा रहे हैं। देश की तस्वीर बदली हुई है। इसी सकारात्मकता के आधार पर लोगों से वोट मांग रहे हैं।
सवाल-आप देश में हुए बदलाव के लिए वोट मांग रहे हैं, कांग्रेस कह रही है कि बदलाव के लिए वोट करें!
कांग्रेस हमारे काम को अच्छा कहेगी तो फिर विपक्ष कैसे रहेगी? उन्हें उनका काम करने दीजिए। सच और झूठ का निर्णय जनता करेगी।
सवाल-क्या कांग्रेस मजबूत विपक्ष है?
मैं सोचता हूं कि अपना काम करना ठीक है। मेरा काम इतना बड़ा है कि नकारात्मक बात करने की आवश्यकता ही नहीं है।
सवाल-लेकिन राजनीति में नकारात्मकता बहुत दिखने लगी है। दोनों पक्षों से।
राजनीति में विचारों की लड़ाई विचारों से करनी चाहिए। मतभिन्नता और मतभेद हो सकते हैं, मनभेद नहीं होना चाहिए। जब मैं भाजपा अध्यक्ष था, मैंने अटलजी की एक बात अध्यक्ष की कुर्सी के पीछे लिखी थी, जो आज भी लिखी हुई है— ‘छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता, टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता।’ दिल बड़ा रखना चाहिए और आगे चलना चाहिए।
सवाल-क्या इसीलिए सोनिया, राहुल से लेकर केजरीवाल तक तारीफ करते हैं?
मैं लोकप्रिय हूं या नहीं, लोगों को तय करना है। अपना काम करते रहना चाहिए।
सवाल-बतौर केंद्रीय मंत्री आपके काम की प्रशंसा है। प्रतिदिन 30 किलोमीटर लंबी सड़क आज बन रही है। यह कैसे हुआ?
इस महीने यह आंकड़ा 33-34 किलोमीटर प्रतिदिन तक पहुंचा है। मैंने जल परिवहन में भी काम किया। भारतमाला व सागरमाला (समुद्र तटों व बंदरगाहों का विकास) दो बड़े प्रोजेक्ट मेरा स्वप्न थे। 11 लाख करोड़ रुपये के काम रोड सेक्टर में किए जबकि सागरमाला में 16 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य में से पांच लाख करोड़ का काम कर चुका हूं। एक लाख करोड़ का वाटर रिसोर्सेस और गंगा का काम किया।
सवाल-नमामि गंगे से लोग संतुष्ट नहीं हैं।
अभी 100 फीसदी काम नहीं किया। हम 26 हजार करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। गंगा की कई उप-नदियां हैं, कई नाले जुड़े हैं। 30 फीसदी काम ही हुआ है। लेकिन हाल में कुंभ में जो लोग गंगा स्नान के लिए आए थे, उन्होंने कहा कि पानी बहुत शुद्ध था। गंगा शत-प्रतिशत अविरल—निर्मल बनेगी। यह वचन है।
सवाल-फिर सत्ता मिली तो चुनौतियां क्या होंगी?
आशा-अपेक्षाएं-आकांक्षाएं बढ़ती जाती हैं। कोशिश होगी कि जो लोगों के पास नहीं है, वे चीजें और सुविधाएं पहुंचें। भय-भूख-आतंक-भ्रष्टाचार से मुक्त हो देश। हम जल्द ही दुनिया की तीन-चार आर्थिक ताकतों में शुमार होंगे। भुखमरी-बेरोजगारी पूरी तरह खत्म होगी।
मोदी के कार्यकाल में ज्यादातर मंत्री चुप रहे। आपका क्या अनुभव रहा?
उनका नेतृत्व विकास की दिशा में रहा है। वह देश के लिए समर्पित लीडर हैं। वह तेजी से फैसले लेते रहे। उन्होंने हिंदुस्तान की प्रतिष्ठा और सम्मान पूरी दुनिया में बढ़ाया है।