नायडू ने मोदी को उनका वादा याद दिलाते हुए कहा कि उन्होंने आंध्र प्रदेश की राजधानी के विकास और सौंदर्यीकरण का वादा किया था, मगर साढ़े चार सालों में केंद्र द्वारा इसके लिए सिर्फ 15 हजार करोड़ रुपए दिए गए।
इसके अलावा नायडू ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा जमीन, पानी, बिजली और सब्सिडी जैसी जरूरी सुविधाओं की जिम्मेदारी लेने के बावजूद केंद्र सरकार कडपा जिले में स्टील कारखाना खोलने में असफल रही। नायडू ने आरोप लगाया कि जब राज्य सरकार ने 11 राष्ट्रीय शिक्षण संस्थानों की स्थापना के लिए 2,909 एकड़ जमीन आवंटित की तब भी केंद्र ने 12,825 करोड़ की जगह मात्र 895 करोड़ रुपए ही दिए।अपने पत्र में नायडू ने ऐसे ही कुल 17 मुद्दे उठाए जिन्हें राज्य के पुनर्गठन के दौरान केंद्र ने पूरा करने का वादा किया था मगर अब तक अधूरे हैं।
रेल मंत्री पियूष गोयल द्वारा की गई दक्षिण तट रेलवे जोन की घोषणा पर नायडू ने कहा कि 172 साल पुराने वाल्टेयर डिवीजन का विभाजन और राज्य के 6,500 करोड़ रुपए का राजस्व घाटा कर के केंद्र आंध्र प्रदेश से बदला ले रही है। नायडू ने कहा कि इस प्रकार रेलवे भर्ती बोर्ड का उल्लेख किए बिना जल्दबाजी में दक्षिण तट रेलवे जोन की घोषणा कर के केंद्र सरकार ने एक बार फिर उत्तरी आंध्र प्रदेश के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाया है।